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AI कंटेंट पर सरकार की नकेल!फर्जी फोटो-वीडियो पर 3 घंटे की डेडलाइन, प्लेटफॉर्म्स की बढ़ी जिम्मेदारी

सोशल मीडिया पर फैल रहे नकली वीडियो और डीपफेक पर अब भारत सरकार ने सख्त नियम लागू किए हैं। AI से बने फोटो, वीडियो और ऑडियो पर टैग लगाना जरूरी होगा। भ्रामक कंटेंट 3 घंटे में हटाना होगा। नियम तोड़ने पर यूजर के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी जिम्मेदार माने जाएंगे।
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फर्जी फोटो-वीडियो पर 3 घंटे की डेडलाइन, प्लेटफॉर्म्स की बढ़ी जिम्मेदारी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    आजकल सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो और फोटो पर आंख बंद करके भरोसा करना मुश्किल हो गया है। कभी किसी नेता का नकली बयान, तो कभी किसी आम व्यक्ति का डीपफेक वीडियो तेजी से फैल जाता है। AI टूल्स ने कंटेंट बनाना आसान किया है, लेकिन इससे झूठ और धोखे का खतरा भी बढ़ गया है।

    AI कंटेंट की पहचान क्यों जरूरी हो गई?

    कई बार यूजर को पता ही नहीं चलता कि जो वीडियो या फोटो वह देख रहा है, वह असली है या मशीन से बनाया गया। इसी भ्रम को खत्म करने और फर्जी कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार ने AI से बने कंटेंट को लेकर नए नियम लागू किए हैं।

    सरकार ने AI कंटेंट पर क्यों लगाए नए नियम?

    सरकार का मकसद साफ है डीपफेक और भ्रामक कंटेंट को रोका जाए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और यूजर दोनों की जिम्मेदारी तय हो। इंटरनेट पर फैल रहे नकली वीडियो और फोटो पर ब्रेक लगाया जाए।

    AI विजुअल पर 10% लेबलिंग जरूरी

    नए नियमों के मुताबिक, कोई भी AI जनरेटेड फोटो या वीडियो हो, तो उसके कम से कम 10% हिस्से में लेबल दिखना जरूरी होगा। ऑडियो और वीडियो क्लिप में भी 10% हिस्सा AI पहचान के लिए होगा ताकि यूजर को साफ पता चल सके कि कंटेंट AI से बना है।

    प्लेटफॉर्म्स को करनी होगी सख्त जांच

    अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को हर यूजर से यह पूछना होगा कि अपलोड किया गया कंटेंट सिंथेटिक (AI से बना) है या नहीं। इसके लिए वेरिफिकेशन टूल्स का इस्तेमाल करना होगा। हर तीन महीने में नियम तोड़ने पर पेनाल्टी की चेतावनी भी देनी होगी।

    5 पॉइंट्स में समझिए नए AI कंटेंट नियम

    AI कंटेंट पर टैग लगाना अनिवार्य

    • अगर वीडियो, फोटो या ऑडियो AI से बना है, तो बिना टैग के पोस्ट नहीं किया जा सकेगा।
    • यूजर को साफ दिखना चाहिए कि कंटेंट असली नहीं है।

    फर्जी AI कंटेंट 3 घंटे में हटाना होगा

    • अगर किसी प्लेटफॉर्म को डीपफेक या भ्रामक AI कंटेंट का पता चलता है, तो उसे 3 घंटे के अंदर हटाना होगा।
    • पहले यह समय 36 घंटे था, अब देरी पर कंपनी जिम्मेदार होगी।

    यूजर को बताना होगा-AI है या नहीं

    • अब पोस्ट करते समय यूजर को बताना होगा कि कंटेंट AI से बना है या नहीं।
    • प्लेटफॉर्म सिर्फ यूजर की बात पर भरोसा नहीं करेगा, बल्कि टेक्नोलॉजी से जांच भी करेगा।

    बच्चों और निजी कंटेंट पर सख्ती

    • बच्चों से जुड़ा गलत कंटेंट
    • बिना सहमति बनाई गई फोटो या वीडियो
    • फर्जी डॉक्यूमेंट या हिंसा दिखाने वाला AI कंटेंट

    ऐसा कंटेंट बिना इंतजार किए सीधे हटाया जाएगा।

    नियम तोड़े तो प्लेटफॉर्म भी जिम्मेदार

    अगर सोशल मीडिया कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करतीं, तो उनकी कानूनी सुरक्षा खत्म हो सकती है। अब सिर्फ यूजर नहीं, प्लेटफॉर्म भी जवाबदेह होगा।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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