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Smart Surveillance :पेंच टाइगर रिजर्व में AI कैमरे अब 180 डिग्री तक देंगे डिजिटल पहरा

पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए अब AI आधारित कैमरे लगाए जा रहे हैं। ये कैमरे 180 डिग्री तक एरिया कवर करेंगे।
पेंच टाइगर रिजर्व में AI कैमरे अब 180 डिग्री तक देंगे डिजिटल पहरा
बफर जोन में कैमरे लगाते हुए वन विभाग के कर्मचारी।
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जंगलों में अब बाघों और इंसानों की सुरक्षा का जिम्मा ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (एआई) कैमरों ने संभाल लिया है। वन्यजीव और मानव के बीच बढ़ते द्वंद्व को रोकने की दिशा में पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने पहल करते हुए रिजर्व के बफर जोन में हाईटेक एआई कैमरे लगाए हैं। ये कैमरे 180 डिग्री तक पूरा कवर करेंगे।  प्रदेश के इतिहास में इस तरह की आधुनिक तकनीक का प्रयोग पहली बार नेशनल पार्क के बफर जोन में हो रही है। यह कवायद मानव-वन्यजीव के संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए किया जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भविष्य में वन्यजीव प्रबंधन की तस्वीर बदल सकता है।

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    खतरे से पहले ही बज उठेगा 'अलर्ट'

    अक्सर देखा जाता है कि टाइगर रिजर्व के बफर जोन के पास स्थित ग्रामीण इलाकों में अचानक बाघ, तेंदुआ के आ जाने से जनहानि होती है या फिर आत्मरक्षा में ग्रामीण वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसी संकट को भांपते हुए पार्क के डिप्टी डायरेक्टर एवं प्रोजेक्ट प्रभारी पुनीत गोयल ने इस विशेष योजना को मैदान में उतारा है।

    50 पॉइंट्स में लगाए गए एआई कैमरे

    गोयल ने बताया कि ये साधारण कैमरे नहीं हैं। ये एआई कैमरे बफर जोन में होने वाली हर छोटी-बड़ी हलचल को पल भर में पहचान लेते हैं। जैसे ही इन कैमरों की नजर किसी बाघ, तेंदुआ या अन्य हिंसक जानवर पर पड़ती है, ये तत्काल वन विभाग के पास एक 'वार्निंग अलर्ट' भेज देते हैं। यह तकनीक मानवीय चूक की संभावना को खत्म कर देती है और रियल-टाइम डेटा प्रदान करती है।

    कंट्रोल रूम से होती है निगरानी

    इस पूरे ऑपरेशन को सुचारु रूप से चलाने के लिए पेंच टाइगर रिजर्व में एक अत्याधुनिक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यहां तैनात अधिकारी और कर्मचारी नजर रखते हैं। जब भी कोई जानवर मानव बस्ती की ओर बढ़ता है, तो सिस्टम से अलर्ट जनरेट होता है। इसके तुरंत बाद विभाग के अफसर सक्रिय हो जाते हैं और संबंधित क्षेत्र के बीट गार्ड व ग्रामीणों को वायरलेस या मोबाइल के जरिए तुरंत सूचित कर देते हैं। इससे ग्रामीणों को उस दिशा में जाने से समय रहते रोका जा सकता है।

    यह कहते हैं वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट

    एआई कैमरों से निगरानी की यह पहल न केवल ग्रामीणों के जीवन को सुरक्षित बनाएगी, बल्कि टाइगर रिजर्व के पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती प्रदान करेगी। टाइगर रिजर्व और आसपास के संवेदनशील इलाकों में तेंदुआ और बाघों की मूवमेंट अब विभाग के अफसरों के मोबाइल पर होने से निश्चित ही संघर्ष की घटनाओं को रोका जा सकेगा।

    डॉ. सोमेश सिंह, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट, वेटरनरी यूनिवर्सिटी, जबलपुर

    प्रदेश में 2025 में मानव-वन्यजीव संघर्ष में 80 लोगों की मौत

    प्रदेश में पिछले एक साल में टाइगर रिजर्व से लगे हुए ग्रामीण क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ एल कृष्णमूर्ति के मुताबिक वर्ष 2025 में प्रदेश में मानव-वन्यजीव के बीच संघर्ष में 80 लोगों की मृत्यु हुई है और 730 लोग घायल हुए हैं।

    लालबर्रा में बाघ के हमले से ग्रामीण की मौत

    21 मार्च 2026 को बालाघाट के लालबर्रा वन क्षेत्र के जंगल में महुआ बीनने के लिए गए एक ग्रामीण की बाघ के हमले में मौत हो गई। बाघ ने युवक के पेट के नीचे का हिस्सा खा लिया था। मृतक बरघाट विकासखंड के ग्राम अंचीवाड़ा निवासी अशोक उईके था।

    अन्य राष्ट्रीय उद्यानों में भी इसी तरह होगी निगरानी

    पेंच टाइगर रिजर्व का यह 'स्मार्ट सर्विलांस' आने वाले समय में अन्य राष्ट्रीय उद्यानों में भी वन्यजीव संरक्षण का आधार बन सकता है। मानव और वन्यजीव के बीच होने वाले द्वंद्व को इससे कम करने में मदद मिलेगी।

    शुभरंजन सेन, पीसीसीएफ मुख्य, वन विभाग मप्र।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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