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म्यांमार से केरल तक फैल रहा ड्रग्स का नया नेटवर्क,साबुन के डिब्बों और बोतलों में छिपाकर पहुंच रहा नशा

भारत में ड्रग्स तस्करी का नया रास्ता सामने आया है। म्यांमार से बांग्लादेश के जरिए केरल तक नशीले पदार्थ पहुंचाए जा रहे हैं। तस्कर साबुन के डिब्बों और पानी की बोतलों में ड्रग्स छिपाकर एजेंसियों को चकमा दे रहे हैं।
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साबुन के डिब्बों और बोतलों में छिपाकर पहुंच रहा नशा

देश में नशे के खिलाफ चल रही सख्ती के बीच ड्रग्स तस्करों ने अब नए रास्ते और नई चालें अपनानी शुरू कर दी हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक अब म्यांमार से बांग्लादेश के रास्ते बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ भारत में पहुंचाए जा रहे हैं और इसका सबसे बड़ा असर केरल में देखने को मिल रहा है। खासतौर पर मालाबार क्षेत्र अब ड्रग्स तस्करी का नया केंद्र बनता जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पहले जहां अफगानिस्तान और पाकिस्तान से ड्रग्स भारत में लाए जाते थे, वहीं अब तस्करों ने अपना पूरा नेटवर्क बदल दिया है। सीमा पर बढ़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई के बाद अब म्यांमार से हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स की सप्लाई तेजी से बढ़ी है।

साबुन के डिब्बों और बोतलों में छिपाकर लाई जा रही हेरोइन

जांच एजेंसियों के मुताबिक तस्कर अब बेहद चालाक तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं। हेरोइन और दूसरे नशीले पदार्थों को छोटी-छोटी मात्रा में साबुन के डिब्बों, प्लास्टिक की बोतलों और रोजमर्रा के सामान में छिपाकर भेजा जा रहा है। इस तरीके से हर बार कम मात्रा में ड्रग्स लाई जाती है ताकि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को शक न हो। यही वजह है कि कई बार जांच के बावजूद तस्कर आसानी से बच निकलते हैं। अधिकारियों का कहना है कि ड्रग्स नेटवर्क अब पहले से ज्यादा संगठित और तकनीकी हो चुका है। छोटे पैकेट्स में सप्लाई होने के कारण इसकी पहचान करना मुश्किल होता जा रहा है।

केरल का मालाबार कॉरिडोर बना नया हॉटस्पॉट

खुफिया एजेंसियों ने केरल के मालाबार क्षेत्र को लेकर खास अलर्ट जारी किया है। कोझिकोड और आसपास के इलाके अब ड्रग्स तस्करी के बड़े केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस इलाके की बंगलूरू-मैसूरु कॉरिडोर से अच्छी कनेक्टिविटी तस्करों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है। सड़क नेटवर्क मजबूत होने की वजह से ड्रग्स को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाना आसान हो गया है। कोझिकोड को अब एक बड़े ट्रांजिट हब के तौर पर देखा जा रहा है, जहां से नशीले पदार्थ देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजे जा रहे हैं।

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हेरोइन और एमडीएमए की मांग तेजी से बढ़ी

जांच एजेंसियों के अनुसार, केरल में हेरोइन और एमडीएमए जैसे सिंथेटिक ड्रग्स की मांग पिछले कुछ समय में काफी बढ़ी है। पहले जहां गांजा ज्यादा इस्तेमाल होता था, वहीं अब युवा तेजी से सिंथेटिक ड्रग्स की ओर बढ़ रहे हैं। हेरोइन के कारोबार में भारी मुनाफा होने की वजह से भी तस्कर इस नेटवर्क को तेजी से बढ़ा रहे हैं। बताया जा रहा है कि एक किलो हेरोइन की कीमत 25 से 30 लाख रुपये तक पहुंच जाती है, जबकि बाजार में इसे और ज्यादा दाम पर बेचा जाता है।

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हाई-प्रोफाइल लोगों और महिलाओं का भी इस्तेमाल

एजेंसियों ने यह भी खुलासा किया है कि तस्कर अब हाई-प्रोफाइल लोगों और सोशल मीडिया से जुड़े चेहरों का इस्तेमाल भी करने लगे हैं। उनका मानना है कि ऐसे लोगों पर कम शक होता है, जिससे जांच से बचना आसान हो जाता है। इसके अलावा महिलाओं को भी ड्रग्स कैरियर के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के मामले बढ़े हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब इन नए पैटर्न पर खास नजर रख रही हैं।

करोड़ों रुपये के ड्रग्स पकड़े गए

हाल के महीनों में केरल से कई बड़े ड्रग्स रैकेट पकड़े गए हैं। कोच्चि के पास अंगमाली इलाके में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनके पास से 600 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। यह हेरोइन साबुन के डिब्बों में छिपाई गई थी। वहीं कोझिकोड में एक अपार्टमेंट से 11.83 किलोग्राम एमडीएमए और गांजा बरामद किया गया। एक अन्य मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर समेत दो लोगों को 3.5 किलोग्राम एमडीएमए के साथ गिरफ्तार किया गया, जिसकी कीमत करीब 3 करोड़ रुपये बताई गई।

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2047 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हाल ही में देश को 2047 तक नशामुक्त बनाने की बात दोहरा चुके हैं। सरकार लगातार ड्रग्स नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है, लेकिन तस्करों के बदलते तरीके एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और महाराष्ट्र जैसे पारंपरिक हॉटस्पॉट के अलावा, अब केरल चिंता का नया केंद्र बनकर उभरा है। 

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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