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नीट पेपर लीक मामला:पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे को 10 दिनों की CBI हिरासत में भेजा गया

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बड़े विवाद में घिर गई है। पेपर लीक के आरोपों ने छात्रों और अभिभावकों में भारी चिंता पैदा कर दी है। सीबीआई इस मामले की गहराई तक जांच में जुटी हुई है और लगातार गिरफ्तारियां हो रही हैं। वहीं, एनटीए ने प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया है।
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पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे को 10 दिनों की CBI हिरासत में भेजा गया
NEET UG

CBI की जांच में पेपर लीक से जुड़े चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। महंगे सौदों के बावजूद कुछ अभ्यर्थियों के फेल होने से सवाल खड़े हुए हैं। बचाव पक्ष लगातार गिरफ्तारी और सबूतों पर सवाल उठा रहा है। पूरा मामला अब कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई का रूप ले चुका है।

CBI की कार्रवाई और गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल

नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है और देशभर में छापेमारी की जा रही है। इसी कड़ी में बायोलॉजी टीचर मनीषा मंधारे को गिरफ्तार किया गया है, जिससे मामले में नया मोड़ आया है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा और संगठित है। पूछताछ में कई ऐसे नाम सामने आ रहे हैं, जो इस रैकेट से जुड़े हो सकते हैं। CBI का फोकस अब पूरे गिरोह की कड़ी जोड़ने पर है। एजेंसी का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि संगठित अपराध है। लगातार हो रही कार्रवाई से शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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10 लाख में पेपर खरीद, फिर भी फेल

CBI की जांच में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसमें अभ्यर्थी ऋषि बिवाल ने कथित तौर पर 10 लाख रुपये में पेपर खरीदा, लेकिन वह परीक्षा में फेल हो गया। इस खुलासे ने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, इसी परिवार के पांच बच्चों के पिछले साल मेडिकल कॉलेज में चयन की बात भी सामने आई है। इससे यह संदेह और गहरा गया है कि यह रैकेट लंबे समय से सक्रिय हो सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही मार्कशीट्स ने भी विवाद को और बढ़ा दिया है। लोग अब पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। यह मामला केवल परीक्षा नहीं बल्कि पूरी प्रक्रिया की जांच का विषय बन गया है।

बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी प्रक्रिया पर उठाए सवाल

मनीषा वाघमारे की ओर से पेश वकील ने CBI की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुणे पुलिस ने उन्हें 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा, जो कानून का उल्लंघन है। बचाव पक्ष का कहना है कि एजेंसी के पास ठोस सबूत नहीं हैं और केवल बयान के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मोबाइल फोन पहले ही जब्त किया जा चुका है, इसलिए आगे की कस्टडी की जरूरत नहीं है। वकील ने अदालत में गिरफ्तारी को अवैध बताया। इस दलील ने मामले को कानूनी मोड़ दे दिया है। अब अदालत का फैसला अहम माना जा रहा है।

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पीवी कुलकर्णी की भूमिका पर भी बहस

पीवी कुलकर्णी के वकील ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल ने केवल प्रश्न तैयार किए थे। उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि वही प्रश्न अंतिम पेपर में शामिल होंगे। बचाव पक्ष का तर्क है कि केवल प्रश्न तैयार करना अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि इस आधार पर किसी को पेपर लीक में शामिल नहीं ठहराया जा सकता। यह दलील मामले को और जटिल बना रही है। CBI इस तर्क को खारिज करते हुए आगे की जांच में जुटी है। एजेंसी का कहना है कि सभी तथ्यों की गहराई से जांच की जा रही है। यह बहस अब जांच का अहम हिस्सा बन चुकी है।

NTA का बड़ा फैसला, दोबारा परीक्षा होगी

विवाद बढ़ने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इस फैसले से कुछ छात्रों को राहत मिली है, लेकिन कई छात्र अब भी असमंजस में हैं। परीक्षा केंद्र बदलने के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। एनटीए का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है। हालांकि, इस फैसले ने नई बहस को जन्म दे दिया है। छात्र संगठनों ने पूरे सिस्टम में सुधार की मांग की है। अब सभी की नजर आगामी परीक्षा और जांच के नतीजों पर टिकी हुई है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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