इस्लामाबाद। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से सीमा तनाव और हमलों की स्थिति रही है। काबुल में हाल ही में हुए हमलों ने दोनों देशों के बीच टकराव को और बढ़ा दिया था। इस बीच पाकिस्तान ने 5 दिनों का अस्थायी संघर्ष विराम (सीजफायर) घोषित किया है, जो ईद‑उल‑फितर तक लागू रहेगा। इस पहल का मकसद न केवल धार्मिक पर्व के सम्मान में शांति बनाए रखना है, बल्कि दोनों देशों की सीमा पर नागरिकों की सुरक्षा और तनाव कम करना भी है।
पाकिस्तान ने 18 मार्च 2026 से 23 मार्च 2026 तक सीमा पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा की है। इस दौरान दोनों पक्षों ने आतंकवादी कार्रवाई, ड्रोन हमला या सीमा पार हमले नहीं करने की शर्त रखी है। अगर कोई सुरक्षा उल्लंघन होता है, तो यह सीजफायर समाप्त हो सकता है और सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है।
सीजफायर का यह कदम विशेष रूप से ईद के अवसर पर लागू किया गया है, ताकि धार्मिक त्योहार के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और क्षेत्रीय तनाव कम हो।
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पिछले कुछ हफ्तों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव तेज हो गया था। खासतौर पर काबुल के एक अस्पताल पर एयरस्ट्राइक ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। अफगान अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में सैकड़ों नागरिक घायल और मारे गए।
पाकिस्तान का दावा है कि, उसके हमले केवल सैन्य ठिकानों और आतंकवादी गुटों को निशाना बनाते हैं। इस विवाद ने दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव को बढ़ावा दिया।
सीजफायर की पहल में सऊदी अरब, कतर और तुर्की ने मध्यस्थता की। इन देशों ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और सीमा पर संघर्ष रोकने की अपील की। इस कदम को धार्मिक पर्व के साथ-साथ कूटनीतिक प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस कदम का स्वागत किया है। यूएन और मानवाधिकार संगठन इसे सकारात्मक निर्णय मानते हैं। मध्यस्थ देशों ने भी इसे क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक संवाद के लिए अहम कदम बताया। यह संघर्ष विराम स्थायी शांति की गारंटी नहीं, बल्कि सीमा पर अस्थायी शांति और विश्वास निर्माण का प्रयास है।
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दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि, अफगानिस्तान में कुछ समूह उसकी सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। अफगानिस्तान का आरोप है कि पाकिस्तान सीमा पार हमला करता है और नागरिक इलाकों को निशाना बनाता है।
इस तनाव का असर केवल सैन्य क्षेत्र तक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में भी देखा जा रहा है। व्यापार, शिक्षा और दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है।
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सीमा पर रहने वाले आम नागरिकों के लिए यह संघर्ष विशेष रूप से मुश्किल रहा है। उनकी सुरक्षा, घर, व्यवसाय और शिक्षा प्रभावित हुए। अब सीजफायर लागू होने से उम्मीद है कि सीमा के पास के बाजार, स्कूल और अस्पताल शांति के साथ काम करना शुरू कर देंगे।