मेट्रो ट्रैक के नीचे डिवाइडर पर विज्ञापन का मामला :विज्ञापन की साइज में एजेंसी ने किया परिवर्तन, होगी जांच- अपर आयुक्त सिंह

वहीं विज्ञापन घोटाले के मामले ने कांग्रेस को भाजपा नेताओं पर हमला बोलने का अवसर दे दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और एमआईसी सदस्य को भ्रष्टाचार की राशि में हिस्सा नहीं मिला, इसलिए हंगामा किया जा रहा है।
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विज्ञापन की साइज में एजेंसी ने किया परिवर्तन, होगी जांच- अपर आयुक्त सिंह
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पीपुल्स संवाददाता, इंदौर। मेट्रो ट्रैक के नीचे डिवाइडर पर विज्ञापन लगाए जाने के मामले में नगर निगम अधिकारियों ने खुलासा किया है कि रेडिसन चौराहे से लेकर बापट चौराहे तक विज्ञापन लगाने के अधिकार विज्ञापन एजेंसी को एक साल पहले ही दिए जा चुके थे। अब जबकि मेट्रो के सेंट्रल डिवाइडर का निर्माण पूर्ण हो चुका है, तो संबंधित एजेंसी ने विज्ञापन लगाना आरंभ कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि जिस आकार के विज्ञापन लगाने की अनुमति दी गई थी, उस आकार के विज्ञापन लगाने के लिए अधिक स्थान की जरूरत थी, जिसके चलते साइज में परिवर्तन किया गया। ऐसा विज्ञापन एजेंसी ने किसकी अनुमति से किया है या मनमाने तरीके से किया गया है, इसकी जांच करवाई जाएगी।

    रेडिसन से बापट तक 45 स्थान पर विज्ञापन अधिकार 

    मार्केट विभाग के अपर आयुक्त आकाश सिंह ने बताया कि रेडिसन से बापट चौराहे तक कुल 45 स्थानों पर लॉलीपॉप लगाने की अनुमति विज्ञापन एजेंसी को दी गई थी, लेकिन एजेंसी ने डिवाइडर पर पौधे लगाए जाने के बाद पौधों को नुकसान न हो, इसलिए लॉलीपॉप का साइज छोटा कर दिया है। मामला संज्ञान में आने के बाद तत्काल जांच की गई, जिसमें पाया गया कि विज्ञापन लगाने के अधिकार 1 जुलाई 2025 को नगर निगम द्वारा दिए जा चुके हैं। इसके लिए टेंडर जारी किए गए थे। इस मामले में जांच का विषय यह है कि एजेंसी द्वारा विज्ञापन लॉलीपॉप की डिजाइन और साइज में परिवर्तन किसकी अनुमति से किया गया है। एजेंसी द्वारा नगर निगम में डिजाइन परिवर्तन की सूचना किसको दी गई और उस पर क्या कार्रवाई की गई।

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    डिवाइडर बनने से पहले भी दिए जा सकते विज्ञापन अधिकार 

    वहीं मामले में विज्ञापन की अनुमति नगर निगम के पूर्व अपर आयुक्त द्वारा दी गई थी। उस समय नियम और शर्तें क्या थीं, इसकी जांच की जाएगी। वहीं एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने सवाल उठाया था कि डिवाइडर का निर्माण पूर्ण नहीं हुआ है, लाइटिंग और कलर का काम बाकी है, विज्ञापन अधिकार नहीं दिए जा सकते हैं। जिस पर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया कि विज्ञापन अधिकार एजेंसियों को देने के लिए ऐसा कोई बंधन नहीं है, टेंडर कभी भी किए जा सकते हैं। फिर भी मामले की जांच करवाई जा रही है, इसलिए जांच के निर्देश दिए गए हैं।

    भाजपा अपने घोटाले खुद बता रही -

    वहीं विज्ञापन घोटाले के मामले ने कांग्रेस को भाजपा नेताओं पर हमला बोलने का अवसर दे दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और एमआईसी सदस्य को भ्रष्टाचार की राशि में हिस्सा नहीं मिला, इसलिए हंगामा किया जा रहा है। कांग्रेस पहले से ही कह चुकी है कि नगर निगम में घोटाले चल रहे हैं, अब हमारी बात को भाजपा के नेता खुद प्रमाणित कर रहे हैं। कांग्रेस की सरकार आएगी तो सभी की जांच होगी।

    वर्जन

    मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई दोषी पाया जाएगा, तो कार्रवाई होगी। विज्ञापन अनुमति के अनुसार ही लगाए गए हैं।
    – क्षितिज सिंघल, निगम आयुक्त

    वर्जन

    नगर निगम में जो घोटाले हो रहे हैं और कांग्रेस जिन्हें जनता के सामने ला रही है, अब भाजपा के एमआईसी सदस्य ही उन घोटालों को सत्यापित कर पूरे शहर को बता रहे हैं कि नगर निगम में 2000 करोड़ का फर्जी फाइल घोटाला हुआ है। अब विज्ञापन घोटाला सामने आया है, जिसमें हिस्सेदारी की लड़ाई चल रही है। इसी कारण यह मामला सार्वजनिक हुआ है।
    – जीतू पटवारी, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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