विकास को रफ्तार :इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को मंजूरी, किसान भी लगा सकेंगे उद्योग

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को संचालक मंडल से मंजूरी मिल गई है। यह कॉरिडोर आठ लेन का बनेगा। इसकी लंबाई 21 किलोमीटर होगी। इस पर करीब 2360 करोड़ रुपए की लागत आएगी।
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इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को मंजूरी, किसान भी लगा सकेंगे उद्योग
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अशोक गौतम, भोपाल। सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को मप्र औद्योगिक विकास निगम (MPSIDC) के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता वाले संचालक मंडल से मंजूरी मिल गई है। यह कॉरिडोर आठ लेन  का होगा, जिसकी लंबाई 21 किलोमीटर होगी। इंदौर से शुरू होकर यह  पीथमपुर एबी रोड में मिलेगा।

    कॉरिडोर के दोनों तरफ होंगे औद्योगिक क्षेत्र

    यह पहली परियोजना होगी, जिसमें किसानों की सहमति से MPSIDC बड़े एरिया में औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रहा है। कॉरिडोर के दोनों तरफ तीन से पांच किलोमीटर तक औद्योगिक क्षेत्र होंगे। किसान अपनी जमीन पर उद्योग लगा सकेंगे या फिर उसे उद्योगों को बेच भी सकेंगे। इस क्षेत्र को पीपीपी मोड पर विकसित किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा कुल विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा किसानों को आवंटित किया जाएगा। इससे कॉरिडोर के आसपास के गांवों के ग्रामीण लाभान्वित होंगे।

    किसानों की 1290 हेक्टयर भूमि की जाएगी विकसित

    प्रस्तावित योजना में कोडियाबर्डी, नैनोद, रिंजलाय, बिसनावदा, नावदा पंथ, श्रीराम तलावली, सिन्दोड़ा, सिन्दोड़ी, शिवखेड़ा, नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, टीही और धन्नड़ जैसे गांवों के किसानों को लाभ मिलेगा। इसमें कुल 1290.74 हेक्टेयर भूमि का विकास किया जाएगा, जिसमें से किसानों को मुआवजे के बदले विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। 

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    17 गांवों की 3,200 एकड़ भूमि परियोजना में शामिल

    कॉरिडोर में कुल 17 गांवों की जमीन शामिल की गई है, जिसमें लगभग 3200 एकड़ क्षेत्र अधिग्रहण के दायरे में है। हालांकि इस प्रक्रिया को लेकर कई जमीन मालिकों ने आपत्तियां भी दर्ज करवाई थीं। स्थानीय स्तर पर सुनवाई के बाद करीब 450 से अधिक अपीलें भोपाल स्थित अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष लंबित हैं, जिनकी सुनवाई फिलहाल जारी है।

    यह है मुआवजा योजना

    राज्य सरकार ने जमीन मालिकों को संतुष्ट करने के लिए लैंड पूलिंग एक्ट के तहत नई योजना लागू की है। इसके तहत भूस्वामी चाहें तो अपनी जमीन के बदले 60 प्रतिशत विकसित भूखंड वापस पा सकते हैं। वहीं जो नकद मुआवजा चाहते हैं, वे शासन की भूमि क्रय नीति के तहत भुगतान प्राप्त कर सकते हैं। निगम अधिकारियों का दावा है कि इस नई नीति से जमीन मालिकों की सहमति बढ़ रही है।

    हाउसिंग स्कीम भी 

    उद्योगों के साथ हाउसिंग स्कीम भी लागू होगी। हाउसिंग स्कीम में कॉलोनाइजर उद्योग में काम करने वाले कर्मचारियों और कारोबारियों के लिए आवास उपलब्ध कराएंगे। इसमें किसान और बिल्डर मिलकर कॉलोनी काट सकेंगे। इसमें दुकानें, मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और ऑफिस एरिया डेवलप होगा।

    विकास कार्य जल्द शुरू होगा

    इस कॉरिडोर को सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसके विकास का काम जल्द शुरू होगा। किसानों के साथ मिलकर क्षेत्र का विकास किया जाएगा। यहां किसान भी अपनी जमीन पर उद्योग लगा सकेंगे। अगर नहीं लगाना चाहते हैं तो वे उसे उद्योगों को बेच भी सकते हैं।     

    चंद्रमौली शुक्ला, MD, MPSIDC

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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