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छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों में बच्चों को आत्मनिर्भरता की शिक्षा के साथ पोषण देने की अनूठी पहल

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के रामानुजनगर के सरकारी स्कूलों में बच्चों ने खाली जगह में बगिया बनाई हैं। विद्यालय की बगिया से सीधे विद्यार्थियों की थाली तक शुद्ध, ताजी और पोषक सब्जियां पहुंचती हैं।
छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों में बच्चों को आत्मनिर्भरता की शिक्षा के साथ पोषण देने की अनूठी पहल
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    गौरव मिश्रा, रामानुजनगर/सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के रामानुजनगर इलाके के सरकारी स्कूलों में बच्चों को स्वावलंबन की शिक्षा के साथ पोषण देने की अनूठी पहल शुरू की गई है। ‘बगिया से थाली तक’ थीम वाली इस पहल के तहत स्कूल परिसरों में सब्जियां उगाई जा रही हैं। खास बात यह है कि स्कूल टाइम में से कुछ समय निकालकर इन पौधों की देखभाल के लिए बच्चों की ड्यूटी लगाई जाती है।

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    बच्चे करते हैं देखरेख और खुद तोड़ते हैं सब्जियां

    बच्चे इन पौधों में पानी देते हैं, देखरेख करते हैं और फिर सब्जियां तोड़ते भी हैं। यही सब्जियां उन्हें मध्याह्न भोजन में परोसी जाती है। इस तरह बच्चे व्यवहारिक शिक्षा के साथ पोषण युक्त भोजन भी ग्रहण कर रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा और बीईओ डीएस लकड़ा की पहल पर माध्यमिक शाला पतरापाली और माध्यमिक शाला पंपानगर एवं परशुरामपुर में यह योजना शिक्षा और स्वास्थ्य का अनूठा संगम पेश कर रही है।

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    भिंडी, बरबटी सहित कई सब्जियां उगाई जा रहीं 

    माध्यमिक शाला पतरापाली के शिक्षक योगेश साहू ने बताया कि पिछले साल स्कूल परिसर में भिंडी, बरबटी, सेम, लाल भाजी, पालक लगाए थे। अब गर्मी आ गई है, इसलिए केवल सेम बचा है। कुछ समय में अब और सब्जियां लगाएंगे। उन्होंने बताया कि स्कूल में इको क्लब के 12 बच्चों में से हर दिन छह बच्चे लंच की छुट्टी और खेल के पीरियड में कुछ समय किचन गार्डन का काम करते हैं।  

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    बढ़ी मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता 

    बालक माध्यमिक शाला उमापुर में किचन गार्डन में मेथी, आलू, गोभी, प्याज, मूली और धनिया की भरपूर पैदावार से थाली की रंगत बदल गई है। माध्यमिक शाला पंपानगर में टमाटर, प्याज, सेम, पालक, लाल भाजी उगाई गई हैं। माध्यमिंक शाला पंपानगर की शिक्षिका प्रियंका सिंह के अनुसार, इस पहल से न केवल मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता बढ़ी है, बल्कि बच्चे जैविक खेती और श्रम का महत्व भी समझ रहे हैं। 

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    ताजी सब्जी का स्वाद ही अलग था 

    हमें स्कूल में पढ़ाई के साथ पौधों की सेवा करना बहुत अच्छा लग रहा है। आज हमने खुद सेमी तोड़ी और उसे दोपहर के खाने में खाया। ताजी सब्जी का स्वाद ही अलग था। अब हम घर की बाड़ी में भी ऐसे ही सब्जियां उगाएंगे।

    रूपा यादव, छात्रा कक्षा 8वीं, माध्यमिक शाला पतरापाली

    हम अपनी थाली का पोषण खुद तैयार कर रहे हैं 

    पढ़ाई के साथ पौधों को खाद-पानी, निराई-गुड़ाई की जानकारी भी मिल रही। स्कूल के किचन गार्डन की पालक और मेथी बहुत ताजी होती है। हमें गर्व है कि हम अपनी थाली का पोषण खुद तैयार कर रहे हैं।

    पवित्री पैकरा, छात्रा, 8वीं, माध्यमिक शाला पम्पनगर नगर

    अभिभावक भी हैं खुश 

    विद्यालय परिसर में शिक्षकों के मार्गदर्शन में बगीचा तैयार किया गया है। इस पहल से बच्चों के अभिभावकों भी खुश हंै। हमारे यहां पिछले साल स्कूल में एक छात्रा के पिता ने भी इस बगिया में सहयोग दिया था।

    कृष्णकुमार यादव और अनिता सिंह, शिक्षक, माध्यमिक शाला पतरापाली

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    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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