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कांकेर बॉर्डर में नक्सली ढांचे को बड़ा झटका?6 माओवादी कैडरों ने हथियार डाल सरेंडर किया

पुलिस और प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब या तो मुख्यधारा में लौटो या कार्रवाई का सामना करो। बस्तर रेंज स्तर से भी अपील की गई है कि शेष माओवादी कैडर हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाएं
6 माओवादी कैडरों ने हथियार डाल सरेंडर किया
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    कांकेर। जिले में नक्सल मोर्चे पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां लगातार बढ़ते पुलिस दबाव और रणनीतिक कार्रवाई के चलते माओवादी संगठन की कमर टूट चुकी हैं। जिससे अब लगातार सरेंडर करने को मजबूर हो गए हैं। पिछले दो दिनों में राजनांदगांव-कांकेर बॉर्डर डिवीजन के 6 सक्रिय माओवादी कैडरों ने हथियार डालते हुए आत्मसमर्पण कर दिया।

    यह आत्मसमर्पण न केवल संख्या के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि अब माओवादी संगठन के भीतर भी भरोसा कमजोर पड़ रहा है और कैडर लगातार बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं।

    इनने किया सरेंडर

    आत्मसमर्पण करने वालों में मंगेश पोडियमी, गणेश वीके, मंगती जुर्री, हिडमे मरकाम उर्फ सुनीता, राजे और स्वरूपा उसेंडी शामिल हैं। इनमें स्वरूपा उसेंडी मिलिट्री कंपनी-05 से जुड़ी रही है, जो नक्सल संगठन की अहम यूनिट मानी जाती है। हालांकि इनके आत्मसमर्पण से जिले में एक फिर माओवादी के आतंक से लोगों को छुटकारा मिला है, साथ ही स्थानीय लोग बिना डर के अपने घरों से बाहर निकल सकते हैं।

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    हथियारों के साथ सरेंडर, नेटवर्क की परतें खुलीं

    सरेंडर के दौरान इन माओवादियों ने 1 SLR और 2 .303 राइफल पुलिस के सामने जमा की हैं। पुलिस के मुताबिक, इनसे पूछताछ में नक्सल नेटवर्क, मूवमेंट और छिपे ठिकानों को लेकर अहम जानकारी मिली है, जिससे आने वाले समय में और बड़े ऑपरेशन की जमीन तैयार हो रही है।पुलिस अब इन सूचनाओं के आधार पर बाकी सक्रिय कैडरों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। साथ ही, संपर्क अभियान के जरिए उन्हें भी मुख्यधारा में लाने की कोशिश तेज कर दी गई है।

    कमजोर पड़ा रहा लाल आतंक

    लगातार आत्मसमर्पण की घटनाएं इस बात का साप संकेत हैं कि माओवादी संगठन अब अंदर से बिखर रहा है। जमीनी स्तर पर कैडरों का मनोबल गिर चुका है और नेतृत्व पर भरोसा कमजोर पड़ता जा रहा है। पिछले 26 महीनों में 2700 से ज्यादा माओवादी कैडरों का मुख्यधारा में लौटना इस बात का प्रमाण है कि अब हिंसा की विचारधारा दम तोड़ रही है।

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    सरेंडर के बाद अब आगे क्या?

    वहीं सरेंडर करने वाले कैडरों को पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और समाज में पुनः स्थापित करने की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि जो हिंसा छोड़ेंगे, उन्हें पूरी सुरक्षा और अवसर मिलेगा। ऐसे में इन कैडरों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार विशेष ध्यान रखेगी और आगे के लिए भी बेहतर जीवन बिताने के लिए खास फोकस करेगी।

    जल्द मुख्यधारा में लौटो या कार्रवाई का सामना करो- पुलिस

    पुलिस और प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब या तो मुख्यधारा में लौटो या कार्रवाई का सामना करो। बस्तर रेंज स्तर से भी अपील की गई है कि शेष माओवादी कैडर हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाएं, अन्यथा लगातार सख्त अभियान जारी रहेगा। कांकेर में यह सरेंडर केवल एक घटना नहीं, बल्कि बदलते हालात का संकेत है जहां अब बंदूक की जगह भविष्य चुनने की होड़ शुरू हो चुकी है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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