जकार्ता। गुरुवार को पूर्वी इंडोनेशिया के तट के पास समुद्र में आए शक्तिशाली भूकंप ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार भूकंप की तीव्रता 7.4 दर्ज की गई, हालांकि शुरुआती आकलन में इसे 7.8 तक बताया गया था। झटके इतने तेज थे कि आसपास के कई इलाकों में लोग घरों से बाहर निकल आए। इस आपदा में अब तक एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है।
भूकंप का केंद्र 1.20 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 126.35 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था, जो मोलुक्का सागर के अंदर आता है। दूसरी ओर चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र के अनुसार यह झटका समुद्र के अंदर करीब 30 किलोमीटर की गहराई पर आया, जिससे इसका प्रभाव और ज्यादा व्यापक हो गया। समुद्र के भीतर इस तरह के गहरे भूकंप अक्सर सुनामी का कारण बन सकते हैं, इसलिए खतरे की आशंका बढ़ गई है।
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भूकंप के तुरंत बाद पैसेफिक सुनामी वॉर्निंग सेंटर ने अलर्ट जारी कर दिया। चेतावनी में कहा गया है कि भूकंप के केंद्र से लगभग 1,000 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक सुनामी लहरें उठ सकती हैं। विशेष रूप से फिलिपींस और मलेशिया के तटीय इलाकों को सतर्क रहने को कहा गया है। समुद्र के स्तर में अचानक बढ़ोतरी और तेज लहरों की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
इंडोनेशिया के उत्तरी मालुकु और उत्तरी सुलावेसी प्रांतों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। टेरनेट और टिडोरे जैसे क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखें। राहत और बचाव एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैनात कर दी गई हैं।
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भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां एक्टिव हो गई हैं। फिलहाल बड़े पैमाने पर नुकसान की कोई स्पष्ट रिपोर्ट सामने नहीं आई है, लेकिन कई इलाकों में इमारतों को नुकसान पहुंचने और लोगों के भयभीत होने की खबरें हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त मदद भेजी जाएगी।
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इंडोनेशिया दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। इसकी मुख्य वजह इसका भौगोलिक स्थान है, जो Pacific Ring of Fire यानी प्रशांत अग्नि वलय में आता है। करीब 40,000 किलोमीटर लंबा यह क्षेत्र सक्रिय ज्वालामुखियों और टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव के कारण बेहद संवेदनशील है। यहां पृथ्वी की प्लेटों के लगातार खिसकने से भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट आम बात हैं, जिससे इस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहता है।
भूकंप के बाद तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच डर का माहौल है। प्रशासन ने साफ कहा है कि अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक निर्देशों का ही पालन करें। आने वाले घंटों में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल सभी प्रभावित देशों में सतर्कता बरती जा रही है।