6 साल की मासूम से दरिंदगी और हत्या... सुप्रीम कोर्ट ने टाली फांसी, अब आखिरी सांस तक जेल में रहेगा दोषी

6 साल की सौतेली बेटी के यौन शोषण और गला घोंटकर हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बदली सजा; हाई कोर्ट ने 2019 में बरकरार रखा था मृत्युदंड
6 साल की मासूम से दरिंदगी और हत्या... सुप्रीम कोर्ट ने टाली फांसी, अब आखिरी सांस तक जेल में रहेगा दोषी
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इंदौर/नई दिल्ली। छह साल की सौतेली बेटी के बार-बार यौन शोषण और गला घोंटकर हत्या के दोषी को मिली मौत की सजा अब उम्रकैद में बदल दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने दोषी की अपील पर सुनवाई करते हुए मृत्युदंड को बाकी बची जिंदगी तक जेल में रहने की सजा में तब्दील कर दिया। हालांकि कोर्ट ने अपराध को बेहद गंभीर और असाधारण परिस्थितियों वाला माना, लेकिन दोषी के पक्ष में मौजूद कुछ ठोस परिस्थितियों को देखते हुए फांसी की सजा को बरकरार नहीं रखा।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता की मां की गवाही को विश्वसनीय माना। कोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न झेल रही महिला का तुरंत शिकायत नहीं कर पाना उसकी गवाही पर संदेह करने का आधार नहीं हो सकता।

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घर की चारदीवारी में फंसी थी महिला

पीठ ने पीड़िता की मां की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहली शादी के बाद वह विधवा हो गई थीं और उनके पास आय का कोई साधन नहीं था। इसके बाद उन्होंने दूसरी शादी की और अपनी बेटी को साथ लेकर नए घर में आईं। कोर्ट के अनुसार, इस घर में उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और वह उन्हीं लोगों से संपर्क कर सकती थीं, जिनसे बात करने की अनुमति पति देता था।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में फंसी महिला से यह उम्मीद करना उचित नहीं है कि उसे मौका मिलते ही पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत करनी चाहिए। घर में जबरन थोपी गई चुप्पी को आरोपी के साथ मिलीभगत मानना भी उचित नहीं होगा।

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सत्र अदालत ने सुनाई थी फांसी

छह साल की बच्ची के बार-बार यौन शोषण और गला घोंटकर हत्या के मामले में सत्र अदालत ने सौतेले पिता को मृत्युदंड सुनाया था। इसके बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने नवंबर 2019 में इस सजा को बरकरार रखा था। दोषी ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।सुप्रीम कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि मामला बेहद गंभीर है और इसमें असाधारण गंभीर पहलू भी मौजूद हैं। इसके बावजूद अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता के पक्ष में कुछ ठोस और वास्तविक परिस्थितियां भी हैं।

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अब जिंदगी भर जेल में रहेगा दोषी

पीठ ने मृत्युदंड को बदलते हुए स्पष्ट किया कि दोषी को अब अपनी बाकी बची जिंदगी जेल में ही बितानी होगी। कोर्ट ने माना कि यह मौत की सजा के बाद दी जाने वाली सबसे कठोर सजा है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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