जबलपुर:30 हजार जीएनएम छात्रों के रिजल्ट पर रोक, हाईकोर्ट सख्त, 24 अप्रैल को अगली सुनवाई

प्रदेश के उन 30 हजार छात्रों पर संकट गहरा गया है, जिन्होंने पिछले साल जीएनएम की परीक्षाएं दी थीं। संजीव सचदेवा और विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इन छात्रों के रिजल्ट घोषित करने की इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया है।
30 हजार जीएनएम छात्रों के रिजल्ट पर रोक, हाईकोर्ट सख्त, 24 अप्रैल को अगली सुनवाई
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार से सभी छात्रों का पूरा ब्यौरा मांगा है और यह साफ किया है कि पहले यह तय होगा कि किसने सही कॉलेज से पढ़ाई की और कौन अयोग्य संस्थानों से जुड़ा है। मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी।

    रिजल्ट जारी करने से साफ इनकार

    डिवीजन बेंच ने सरकार की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें छात्रों के रिजल्ट घोषित करने की अनुमति मांगी गई थी। बेंच ने साफ कहा कि बिना पूरी जांच के रिजल्ट जारी नहीं किए जा सकते। सरकार को निर्देश दिया गया है कि सभी 30 हजार छात्रों का विस्तृत ब्यौरा पेश करे। इसमें यह बताना होगा कि किस छात्र ने किस कॉलेज में एडमिशन लिया था। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि छात्रों ने रोजाना क्लास अटेण्ड की थीं या नहीं। बेंच की मंशा साफ है कि केवल पात्र छात्रों को ही आगे बढ़ने दिया जाए।

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    फर्जी कॉलेजों पर सख्त टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए फोटोग्राफ्स ने कोर्ट को चौंका दिया। फोटो देखकर बेंच ने कहा कि यह कॉलेज नहीं बल्कि शटर वाली दुकान है। ऐसे संस्थानों में पढ़ाई होने पर कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए। बेंच ने पूछा कि ऐसे कॉलेज से पढ़कर कोई स्टूडेंट ऑफ मेडिसिन कैसे बन सकता है। इस टिप्पणी से पूरे मामले की गंभीरता सामने आ गई है। कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि फर्जीवाड़े को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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    ट्रांसफर की मांग भी ठुकराई

    बता दें कि इटारसी के दो नर्सिंग छात्रों ने कोर्ट से अपील की थी कि उनका कोर्स पूरा हो चुका है। उन्होंने मांग की थी कि उन्हें किसी योग्य कॉलेज में ट्रांसफर कर परीक्षा देने दी जाए। लेकिन बेंच ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने से अमान्य कॉलेजों पर मुहर लग जाएगी। यह कदम गलत संदेश देगा और फर्जी संस्थानों को बढ़ावा मिलेगा। इसलिए ऐसी किसी भी राहत से कोर्ट ने साफ इनकार कर दिया।

    24 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई 

    डिवीजन बेंच ने इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि अब यह पता लगाना जरूरी है कि कौन सा छात्र सही है। अगर किसी छात्र ने मान्यता प्राप्त कॉलेज में पढ़ाई की है तो वह योग्य माना जाएगा। लेकिन जिन्होंने बिना क्लास अटेण्ड किए परीक्षा दी, उनकी पात्रता पर सवाल रहेगा। सरकार को सभी छात्रों का पूरा रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी, जिसमें स्थिति और साफ होगी।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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