Naresh Bhagoria
3 Jan 2026
Naresh Bhagoria
2 Jan 2026
Shivani Gupta
2 Jan 2026
आशीष शर्मा, ग्वालियर। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में लोगों की पसंदीदा सब्जी ‘जुकिनी’ की खेती प्रायोगिक तौर पर राजमाता विजयाराजे सिंधिया विश्वविद्यालय में की जा रही है। विवि प्रबंधन के अनुसार, बाद में किसानों को इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। खीरे जैसी दिखने वाली इस सब्जी में बीटा कैरोटिन होता है, जो आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक होती है। विवि में पॉली हाउस में अक्टूबर 2025 में इसके बीज रोपे थे, अब फसल तैयार हो चुकी है। किसान साल में तीन फसल (जनवरी से अप्रैल, अप्रैल से अगस्त, सितंबर से दिसंबर) लेकर आय में इजाफा कर सकते हैं। इसका पौधा झाड़ीनुमा और फूल पीले निकलते हैं। एक पौधे पर 7 से 8 फल आते हैं। जुकिनी के एक पीस की कीमत 35 से 50 रुपए तक होती है।
जुकिनी विदेशों में यह पसंदीदा सब्जी मानी जाती है। इसमें विटामिन सी, मैंगनीज और फाइटोन्यूट्रिएंट्स होता है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। बैक्टीरिया, वायरल इन्फेक्शन जैसी मौसम संबंधी समस्याओं से बचाने में भी यह मदद करती है। इसमें मौजूद पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने, कोलेस्ट्रॉल को कम करने और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में मदद करती है।
जुकिनी का वानस्पतिक नाम कुकुरबिटा पेपो है, जो कद्दू परिवार का एक प्रकार है। ये गर्मियों की स्क्वैश के रूप में जाना जाता है। इसकी खेती यूरोप (फ्रांस, इटली, ब्रिटेन), अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में होती है। भारत में झारखंड व बिहार में इसकी खेती हो रही है।
खीरे जैसी दिखने वाली इस विदेशी सब्जी में जुकिनी में एंटीऑक्सीडेंट और बीटा कैरोटिन भरपूर मात्रा में होता है, जो कि स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभकारी है। किसान इसकी खेती करके आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं।
प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला, कुलपति, कृषि विवि ग्वालियर