पटना। रामजी से पूछें जनकपुर की नारी....इस लोकगीत की डिमांड शुक्रवार को मैथिली ठाकुर से तब भी की गई जब वे विधायक बनने की ओर अग्रसर थीं। सिर्फ 25 साल में विधायक बनने वाली बिहार की सबसे युवा विधायक बन गई हैं। उन्होंने अपनी सीट पर 11 प्रत्याशियों को शिकस्त देकर यह जीत हासिल की है। उन्होंने RJD के विनोद मिश्रा को 11,730 वोटों से पराजित किया। उन्हें 25वें राउंड में 84,915 वोट प्राप्त हुए। विनोद मिश्रा 73185 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। हालांकि मैथिली की जीत में BJP और NDA के नेताओं ने मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
अलीनगर से मैथिली को प्रत्याशी घोषित करते हुए BJP और NDA के नेताओं पर उन्हें जिताने की जिम्मेदारी आ गई। मैथिली ने चुनाव के कुछ दिन पहले 14 अक्टूबर 2025 को ही भाजपा की सदस्यता ली थी। लिहाजा उन्हें राजनीति का कोई अनुभव नहीं था। पारिवारिक सदस्यों का भी दूर-दूर तक राजनीति से वास्ता नहीं था। अमित शाह उनके लिए प्रचार करने पहुंचे। वहीं भाजपा ने भी मैथिली के समर्थन में पूरी ताकत झोंक दी थी। मैथिली ठाकुर की साफ सुथरी छवि का भी उन्हें फायदा मिला।
दरभंगा जिले के अलीनगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार मैथिली ठाकुर को 'बाहरी' कहकर विरोध किया गया। यह उनके लिए सबसे कठिन दौर था। सोशल मीडिया पर भी उनके गायकी प्रोग्राम के लिए ज्यादा राशि मांगने को लेकर बहस चलती रही। हालांकि मैथिली भाषा में परिपक्व मैथिली ने अपनी बोली में बात कर और अपने भजनों से लोगों का दिल जीतने के सफल कोशिश की। गौरतलब है कि मैथिली मूल रूप से मधुबनी जिले से हैं। हालांकि कुछ समय से वह अपने माता-पिता और भाइयों के साथ दिल्ली में रहती हैं।
चुनाव प्रचार के दौरान मैथिली ने कहा था कि कई लोगों ने अलीनगर का नाम बदलने की मांग की है, इस मांग को प्राथमिकता से अपने वरिष्ठ नेताओं के सामने रखेंगी। मैथिली ने यह भी कहा था कि 'मैं अलीनगर में घर बनाना चाहती हूं और इसे ही अपना स्थायी ठिकाना बनाऊंगी। मेरे ननिहाल की जड़ें यहीं हैं। मैं कहीं और नहीं रहना चाहती।'