हमारी दौड़ती भागती ज़िंदगी में सबसे ज्यादा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। अलग-अलग समय पर खाना, तला भूना, फॉस्ट फूड ये वो खाना है जिसे हमें बिना सोचे समझे कभी भी खा लेते हैं लेकिन इससे हमारे पेट की सेबत पर बुरा असर पड़ता है। जो सीधे हमारे पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। गलत समय पर खाना, तला-भुना भोजन, फाइबर की कमी और तनाव की वजह से गैस, अपच, कब्ज और पेट भारी रहने जैसी समस्याओं से घिरा रहते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, हरा चना त्रिदोष संतुलन में मदद करता है और खासतौर पर पित्त व कफ को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है। यह पेट में जमी अतिरिक्त नमी और चिपचिपेपन को कम करता है, जिससे आंतों की गतिविधि बेहतर होती है और पेट साफ रहता है।
हरा चना खाने से बॉडी को क्या-क्या फायदे
- वैज्ञानिकों के मुताबिक, हरा चना डाइटरी फाइबर का बेहतरीन स्रोत है। इसमें मौजूद घुलनशील और अघुलनशील फाइबर पाचन को दुरुस्त रखते हैं, मल को नरम बनाते हैं और कब्ज, गैस व सूजन जैसी परेशानियों से राहत दिलाते हैं।
- हरा चना धीरे-धीरे पचता है, इसलिए पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और वजन नियंत्रण में भी मदद मिलती है। आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और विटामिन-बी जैसे पोषक तत्वों से भरपूर हरा चना पाचन के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है।
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पोषक तत्वों का पावरहाउस है चना
- हरा चना पोषक तत्वों से भरपूर एक संपूर्ण आहार माना जाता है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
- ये तत्व आंतों की अंदरूनी परत को मजबूत बनाते हैं और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। जिन लोगों को अक्सर एसिडिटी या पेट में जलन की समस्या रहती है, उनके लिए हरा चना पेट को ठंडक देने वाला साबित हो सकता है।
- सेहत के लिहाज से हरा चना सिर्फ पाचन तक सीमित नहीं है। इसमें मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूती देता है और शरीर की कमजोरी दूर करने में सहायक होता है।
- आयरन की अच्छी मात्रा खून की कमी को दूर करने में मदद करती है। वहीं फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स दिल को स्वस्थ रखने और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में उपयोगी माने जाते हैं। इसके अलावा, हरा चना शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर बीमारियों से लड़ने की ताकत भी बढ़ाता है।