विश्व आदिवसी दिवस-‘जब तक तय लक्ष्य पूरे न हों, तब तक उस दिशा में निरंतर कार्य करने का संकल्प लें’

सोहागपुर। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी एक्टिविस्ट और एडवोकेट विक्रम परते ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1994 में 9 अगस्त को विश्व के आदिवासी समुदायों के अधिकारों और सरोकारों के प्रति जागरूकता के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र स्थायी फोरम ऑन इंडिजिनस इश्यूज (UNPFII) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मंच आदिवासी समुदायों से जुड़े आर्थिक एवं सामाजिक विकास, संस्कृति, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, भाषा और मानवाधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विमर्श और कार्य को बढ़ावा देता है।
केवल भाषण नहीं, समाधान के लिए तय हों लक्ष्य
विक्रम परते ने विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों में शामिल वक्ताओं, जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों से अपील की कि समारोहों में होने वाली चर्चा केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, संस्कृति और पर्यावरण जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हो तथा इनके समाधान के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। जब तक तय लक्ष्य पूरे न हों, तब तक उस दिशा में निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच और सामूहिक प्रयासों से ही आदिवासी समाज के वर्तमान को बेहतर और भविष्य को मजबूत बनाया जा सकता है।
नर्मदांचल में हुए विविध आयोजन

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर होशंगाबाद, माखन नगर, सोहागपुर, पिपरिया, मटकुली, सिवनी मालवा, केसला, सुखतवा, ऑर्डिनेंस फैक्ट्री, कालाआखर सहित समूचे नर्मदांचल में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं इटारसी में 13 अगस्त को कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी।
नशे से दूरी और एक वृक्ष भी जरूरी
विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज से अपील करते हुए विक्रम परते ने कहा कि समाज को नशे से दूर रहना चाहिए। “नशा नाश का मूल है” इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नशे से दूरी और एक वृक्ष जरूरी आज हमारा संकल्प होना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का आह्वान किया और कहा कि उन्होंने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा वर्तमान और भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है अतः पौधे लगाएं, और प्रकृति तथा भविष्य बचाएं।
कौन हैं विक्रम परते
सोहागपुर के आदिवासी एक्टिविस्ट एवं एडवोकेट विक्रम परते क्षेत्र में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। प्रतिवर्ष उनकी वैष्णो देवी साइकिल यात्रा ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है। वहीं आदिवासी अंचलों में पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों ने उनकी सामाजिक सक्रियता को नई पहचान दी है।विक्रम परते ने अपनी सक्रियता के माध्यम से सोहागपुर सहित नर्मदापुरम जिले और मध्यप्रदेश का नाम राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया है। उन्हें संयुक्त राष्ट्र से जुड़े महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंचों न्यूयॉर्क (अमेरिका) और जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में सहभागिता का अवसर भी मिला है।












