World Poha Day :ऊसल पोहे से लेकर पोहे के कटलेट, पकौडे और चीले भी बनते हैं, इंदौरी पोहा का स्वाद दुनियाभर में

मप्र की आर्थिक राजधानी इंदौर पोहे की भी राजधानी है। इंदौरी पोहे का स्वाद ऐसा कि हर दिन 25-30 टन की खपत होती है। इंदौर में पोहे के नए-नए प्रयोग भी देखने को मिलते हैं। यहां का ऊसल पोहा हो या ड्रायफ्रूट पोहा हर एक का स्वाद निराला है। यही नहीं, पोहे के कटलेट, पोहे के पकौड़े, पोहे का चीला भी स्पेशल डिश बन गई हैं।
ऊसल पोहे से लेकर पोहे के कटलेट, पकौडे और चीले भी बनते हैं, इंदौरी पोहा का स्वाद दुनियाभर में

अखिल सोनी इंदौर। इंदौर की सुबह पोहे की खुशबू से शुरू होती है और रात की भूख भी अक्सर इसी स्वाद पर आकर थमती है। शहर में प्रतिदिन 25 से 30 टन (होटल और घरेलू) पोहे की खपत इस बात का प्रमाण है कि यह केवल एक नाश्ता नहीं, बल्कि इंदौर की पहचान बन चुका है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी इंदौरी पोहे का स्वाद चखे बिना शहर से लौटना नहीं चाहते, जिससे इसकी ख्याति लगातार वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है।

उज्जैन की मिलों में बनता है 

दिलचस्प बात यह है कि जिस पोहे ने इंदौर को वैश्विक पहचान दिलाई, उस शहर में एक भी पोहा मिल नहीं है। यहां खाया जाने वाला अधिकांश पोहा उज्जैन की मिलों में तैयार होता है, जहां का पानी इसकी गुणवत्ता और स्वाद के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। 

पोहे से कितने करोड़ा का कारोबार होता है

सिर्फ पोहे की बिक्री के आधार पर इंदौर में लगभग 60 से 65 करोड़ सालाना कारोबार माना जा सकता है।

 क्या कहते हैं आंकड़े (प्रतिदिन खपत) 

इंदौर  : 25-30 टन

भोपाल : 2-3 टन

जबलपुर : 2.5- 3 टन

ग्वालियर : 1-1.5 टन

(सोर्स: पोहा एसो. और स्थानीय थोक बाजार)

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विदेशों में इंदौर से निर्यात :

मि़डिल ईस्ट : 3-4 टन

यूके : 2-3 टन

ऑस्ट्रेलिया : 2-3 टन

यूएस : 2-3 टन

 इंदौर का पोहा अलग क्यों? :

  • ड्रायफ्रूट पोहा : पोहे में काजू, बादाम और पिश्ता की कतरन डालते हैं
  • फ्रूट पोहा : इसमें अनार, अंगूर और गाजर डालते हैं
  • ऊसल पोहा : इसमें मौंठ को तरी में तैयार कर देते हैं
  • पनीर पोहा : पोहे में पनीर के बारिक टुकड़े और ऊसल डाला जाता है
  • जीरावन सेव पोहा : इसमें जीरावन पाउडर और सेव को डाला जाता है

पोहे से क्या-क्या बनता है 

  • पोहे के कटलेट : उबले आलू और मसालों के साथ।
  • पोहे के पकोड़े : बेसन और मसालों के साथ तले हुए।
  • पोहे का चीला : पीसे हुए पोहे के घोल से बनाया जाता है।
  • पोहे का उपमा : सब्जियों और मसालों के साथ।
  • पोहे का नमकीन (चिवड़ा) : सूखे मेवे, मूंगफली और मसालों के साथ।

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इंदौर की पहचान पोहा लेकिन मिल एक भी नहीं

इंदौरी पोहा सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है लेकिन सबसे बड़ी यह है कि यहां एक भी पोहा मिल नहीं है। सारा पोहा उज्जैन में बनता है। उज्जैन में करीब 40 से अधिक पोहा मिल हैं। एक इंदौर में पोहा मिल न होने का कारण यहां के पानी है। मिल कारोबारियों का कहना है कि काफी प्रयास हुए लेकिन इंदौर का पानी पोहा में स्वाद नहीं ला पाया। उज्जैन का पानी पोहा बनाने को लेकर सबसे अच्छा माना गया इसलिए यहां सर्वाधिक मिल हैं।

अब इंस्टेट पोहा भी बनने लगा

इंदौर का पोहा देश और दुनिया में अलग ही पहचान बना चुका है। अब तो इंस्टेंट पोहा भी बनने लगा है लेकिन इसकी खपत काफी कम है। यहां का पोहा विदेशों तक जाता है।

सुनील मेहता, सचिव, चावल व्यापारी एसोसिएशन, इंदौर

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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