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वन स्टॉप सेंटर-शेल्टर होम में महिलाएं ‘राम भरोसे’, न पर्याप्त डॉक्टर हैं न पूरी सुरक्षा

कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में महिला सुरक्षा पर पेश रिपोर्ट से हुआ खुलासा
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वन स्टॉप सेंटर-शेल्टर होम में महिलाएं ‘राम भरोसे’, न पर्याप्त डॉक्टर हैं न पूरी सुरक्षा

पुष्पेन्द्र सिंह 
भोपाल। प्रदेश के वन स्टॉप सेंटर और शेल्टर होम में पीड़ित महिलाओं और यौन उत्पीड़न की शिकार बालिकाओं के लिए न सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं और न ही अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर तत्काल उपचार की सुविधा है। काउंसलर्स की पर्याप्त संख्या नहीं होने से भी पीड़ित महिलाओं को रास्ता नहीं मिल पाता। यह खुलासा हाल ही में भोपाल में आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर्स कॉफ्रेंन्स में पुलिस अधीक्षकों ने किया है। पुलिस अफसरों ने बताया कि पीड़ित महिला को 24 घंटे 7 दिन लेने की व्यवस्था नहीं होती है। इसके पलट वन स्टॉप सेंटर की केस वर्करों का कहना है कि पीड़ित महिलाओं के साथ महिला आरक्षक नहीं होने से सुरक्षा का खतरा बना रहता है। हर दिन औसतन 20 महिलाओं के साथ दुष्कृत्य : दो माह पहले विधानसभा में गृह विभाग ने बताया कि प्रदेश में रोजाना 20 महिलाओं के साथ बलात्कार और 33 महिलाओं के अपहरण हो रहे हैं। इस साल जनवरी से लेकर जून तक प्रदेश में 3,742 महिलाओं के साथ रेप की घटनाएं हुईं। वर्ष 2018 से लेकर 2024 के बीच सात सालों में 54,067 महिलाओं से बलात्कार हुए।

महिलाओं के विरुद्ध अपराध

प्रकार                 प्रतिशत
अपहरण               36
पति क्रूरता            22
छेड़छाड़               19
दुष्कृत्य               15
अन्य                  08
कुल                  100 
स्त्रोत: कलेक्टर-कमिश्नर्स कॉफ्रेंन्स 

 ये खामियां

-जानकारी साझा करने में बाधाएं और पुलिस व अन्य विभागों के बीच समन्वय की कमी।
-24 घंटे कार्य की क्षमता नहीं, चिकित्सा किट की कमी और कमजोर अधोसंरचना।
-रात में डॉक्टर/संसाधनों की कमी, चिकित्सा जांच में देरी, रात में जांच की कमी।

 इसलिए वन स्टॉप सेंटर : सभी प्रकार की हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता जैसे-पुलिस-सहायता, विधिक-सहायता, अस्थायी आश्रय, चिकित्सा- सहायता एवं काउन्सलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। यह योजना भारत सरकार द्वारा मिशन शक्ति-संबल अंतर्गत शत-प्रतिशत सहायता प्राप्त है।

महिला पुलिस नहीं होने से खतरा

सेंटर में जब महिलाएं आती हैं तो उनके साथ महिला पुलिस नहीं होती। इसके लिए कई बार लिखा-पढ़ी भी की गई। रात में केयर टेकर और एक गार्ड रहता है। बच्चियां बीमार होती हैं तो अस्पताल लेकर जाना पड़ता है।
उर्मिला विश्वकर्मा, केस वर्कर, वन स्टॉप सेंटर, अनूपपुर

 सर्विस प्रोवाइडर्स की  कमी 

महिलाओं से जुड़े मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि इससे जुड़े सर्विस प्रोवाइडर्स की संख्या  कम हुई है। महिला सुधार गृह भी पूरे प्रदेश में केवल 13 है । ऐसे में जरूरी है कि नए केन्द्र खोलने के पहले, मौजूद केन्द्र को अधिक सुविधाएं दी जाएं।

समर खान,  संचालक, निर्भया आश्रम

People's Reporter
By People's Reporter
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