नई दिल्ली। महिला आरक्षण को लेकर संसद में बड़ा राजनीतिक टकराव देखने को मिला। लोकसभा में पेश किया गया संशोधन बिल पास नहीं हो पाया और इसके बाद सियासत गरमा गई है। एक तरफ कांग्रेस और विपक्ष इसे लोकतंत्र की जीत बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार इसे महिलाओं के साथ अन्याय कह रही है। इस पूरे मामले ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा एक संशोधन बिल पेश किया गया था, लेकिन यह जरूरी बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया। बिल पास होने के लिए जितने वोट चाहिए थे, उतने नहीं मिले। इसके बाद संसद की कार्यवाही भी अनिश्चित समय के लिए स्थगित कर दी गई। इस घटनाक्रम के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि, यह लोकतंत्र और संविधान की बड़ी जीत है। उनके मुताबिक, विपक्ष ने मिलकर सरकार की उस कोशिश को रोक दिया, जिससे लोकतंत्र कमजोर हो सकता था। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह बिल जल्दबाजी में लाया और इसका मसौदा भी आखिरी समय पर सामने रखा गया, जिससे उनकी मंशा पर सवाल उठते हैं।
प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार महिलाओं के नाम पर राजनीति कर रही थी। उनका कहना है कि, अगर बिल पास हो जाता तो सरकार इसे अपनी जीत बताती और अगर नहीं होता तो विपक्ष को महिला विरोधी साबित करने की कोशिश करती। उन्होंने यह भी कहा कि, यह बिल असल में महिला आरक्षण के लिए नहीं, बल्कि परिसीमन से जुड़ा हुआ था।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को देश की महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उनका कहना है कि, यह दिन विपक्ष के लिए काला दिन है और उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ काम किया है।
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जानकारी |
संख्या |
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लोकसभा की कुल सीटें |
543 |
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भरी सीटें |
540 |
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मौजूद सांसद |
528 |
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जरूरी वोट (दो-तिहाई) |
352 |
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पक्ष में वोट |
298 |
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विरोध में वोट |
230 |
इस तरह बिल को पास होने के लिए 352 वोट चाहिए थे, लेकिन उसे केवल 298 वोट मिले। यानी 54 वोट कम पड़ गए और बिल गिर गया।
विपक्ष का कहना है कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि, वह पहले से पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करने के पक्ष में है। प्रियंका गांधी ने कहा कि, अगर सरकार सही तरीके से महिला आरक्षण लागू करे, तो विपक्ष पूरा समर्थन देगा।
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प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि, जब कई राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, तब इतनी जल्दी में यह बिल क्यों लाया गया। उनका कहना है कि, सरकार ने इसे राजनीतिक फायदे के लिए पेश किया, ताकि महिलाओं के मुद्दे पर अपनी छवि मजबूत की जा सके।
प्रियंका गांधी ने कहा कि, अगर सरकार सच में महिलाओं के लिए काम करती, तो मणिपुर, हाथरस और महिला खिलाड़ियों से जुड़े मामलों में बेहतर कदम उठाए जाते। उन्होंने कहा कि, सिर्फ दावा करने से कोई महिलाओं का हितैषी नहीं बन जाता।