ढाका। बांग्लादेश में चुनावी जीत के बाद BNP अध्यक्ष तारिक रहमान ने देशवासियों से एकता बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने इस जीत को उन सभी लोगों को समर्पित किया, जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा और उसकी बहाली के लिए त्याग किया। शनिवार को जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह जीत किसी एक दल की नहीं, बल्कि पूरे बांग्लादेश और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों की जीत है।
दूसरी ओर BNP नेता फखरुल इस्लाम ने कहा कि बांग्लादेश की ओर से भारत से हसीना को वापस भेजने का अनुरोध किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया तय नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहकर ही आगे बढ़ाई जाएगी।
जनता के मताधिकार से लौटा जनादेश- तारीक
तारिक रहमान ने कहा कि जनता की सक्रिय भागीदारी के चलते डेढ़ दशक से ज्यादा समय बाद सीधे मतदान के जरिए संसद और सरकार की वापसी संभव हो पाई है। उन्होंने जोर दिया कि देश को मजबूत रखने के लिए सभी को एकजुट रहना होगा, ताकि कोई भी नकारात्मक ताकत दोबारा तानाशाही थोपने की कोशिश न कर सके और बांग्लादेश किसी के दबाव में न आए। उन्होंने कहा कि अब समय है लोकतंत्र को मजबूत करने और देश को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर जिम्मेदारी निभाने का।
भारत- बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि मौजूद- फखरुल
इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में फखरुल से जब पूछा गया कि सत्ता में आने पर क्या बीएनपी औपचारिक रूप से प्रत्यर्पण की मांग करेगी, तो उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच पहले से ही प्रत्यर्पण संधि मौजूद है। जरूरत पड़ने पर उसी प्रावधान के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की इच्छा यही होगी कि संबंधित व्यक्ति को वापस भेजा जाए।
आगे उन्होनें भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर फखरुल ने कहा कि यह मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों में बाधा नहीं बनेगा। उनका कहना था कि भारत ने कभी यह नहीं कहा कि वह शेख हसीना को वापस नहीं भेजेगा। आगे क्या होगा, यह उस समय की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फखरुल ने भरोसा जताया कि समय के साथ इस मसले का समाधान निकल आएगा।
ट्रिब्युनल कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा
बांग्लादेश की विशेष ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सजा सुनाई है। दरअसल अगस्त 2024 में देश में हुए बड़े जनआंदोलन के बाद शेख हसीना ने सत्ता छोड़ दी थी और तब से वह भारत में रह रही हैं। इसके बाद नवंबर 2024 में बांग्लादेश की एक विशेष ट्रिब्यूनल ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसक कार्रवाइयों से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराध के एक मामले में उन्हें गैरहाजिर रहते हुए दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई थी। यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है।