जबलपुर :कान्हा की नेपियर और जबलपुर की सेकरम घास के मुरीद हुए असम से आए जंगली भैंसे, विभाग कर रहा 24 घंटे सीसीटीवी से निगरानी

जबलपुर। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में असम से आए 'राजसी मेहमान' यानी जंगली भैंसों (वाइल्ड बफेलो) के कुनबे ने न केवल प्रदेश की आबोहवा को अपनाना शुरू कर दिया है, बल्कि उन्हें यहां का खान-पान भी रास आने लगा है। इन जंगली भैंसों के भोजन को लेकर वन विभाग के अफसरों की चिंता तब दूर हुई जब कान्हा की नेपियर और जबलपुर से गई सेकरम घास का स्वाद इन भैंसों की पहली पसंद बन गया। विभागीय अधिकारी इसे इनके सफल पुनर्वास की दिशा में एक सुखद संकेत मान रहे हैं। गौरतलब है कि असम के काजीरंगा से 4 जंगली भैंसे कान्हा टाइगर रिजर्व लाए गए हैं, जिन्हें 28 अप्रैल को सीएम ने बाड़े में रिलीज किया है।
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने खुद संभाला है मोर्चा
इस संबंध में पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ समिता राजौरा ने बताया कि आसाम से लाए गए इन जंगली भैंसों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी और वाच टावर के जरिए त्रिस्तरीय निगरानी तंत्र के साथ हर घंटे वे पार्क प्रबंधन से इनकी रिपोर्ट ले रही हैं। साथ ही हम लगातार उनके व्यवहार का अध्ययन कर रहे हैं। यह हमारे लिए अत्यंत उत्साहजनक है कि कान्हा और जबलपुर से लाई गई घास उन्हें भोजन के रूप में बेहद पसंद आ रही है। जब वन्यजीव स्थानीय भोजन को अपना लेते हैं, तो उनके नए वातावरण में ढलने की प्रक्रिया काफी आसान हो जाती है।
यह भी पढ़ें: भोपाल में कल बिजली कटौती : 30 से ज्यादा इलाकों में 3 से 6 घंटे तक सप्लाई प्रभावित
गर्मी से राहत के लिए बाड़े में 'हौज' और 'फुहारे'
कान्हा के डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा ने बताया कि पीसीसीएफ के निर्देशन में बढ़ती गर्मी को देखते हुए वन विभाग ने कान्हा के सूपखार क्षेत्र में बनाए गए विशेष बाड़ों में जंगली भैंसों के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। यहां पर इनको शीतलता प्रदान करने के लिए विशेष रूप से पानी के हौज तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही, बाड़े में फुहारे की व्यवस्था भी की गई है, ताकि तापमान बढ़ने पर भैंसों को प्राकृतिक वातावरण जैसा अहसास हो और वे गर्मी के तनाव से मुक्त रह सकें।
इको सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण है घास
राज्य वन अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. उदय होंमकर ने बताया कि जंगल में इको सिस्टम के लिए सेकरम घास महत्वपूर्ण भूमिका है। यह घास मिट्टी रोकने से लेकर शाकाहारी वन्य जीवों (जंगली भैंसों) के लिए पसंदीदा भोजन होती है। यह बहुवर्षिक होता है। इसके नए कोपलों को वन्य पशु चाव से खाते हैं। वहीं नेपियर घास जिसे हाथी घास भी कहते हैं कि कोमल शाख भी वन्य जीवों के भोजन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। ये अधिक उत्पादन करने वाली घास है। दोनों ही प्रजातियां अधिक उत्पादन देती हैं, साथ ही मृदा संरक्षण में मदद करती हैं।











