पल्लवी वाघेला, भोपाल। शक के अलावा जिद और असुरक्षा की भावना जैसी बातें भी परिवार को तोड़ने का कारण बन सकती हैं। ऐसे ही एक मामले में भोपाल के मध्यस्थता केंद्र में समझौता कराया गया। मामले में पति ने पत्नी के मन में बसी आर्थिक असुरक्षा की भावना को दूर करने के लिए 5 साल की बेटी के नाम संपत्ति का एक हिस्सा किया है। बता दें, यहां पति और पत्नी दोनों की दूसरी शादी है। दोनों का तलाक हो चुका है। जहां पति की पहली शादी से 15 और 17 साल के दो बच्चे हैं, वहीं पत्नी का करीब 19 साल का एक बेटा है। इसके अलावा इस शादी से दंपति की 5 साल की बेटी है, जिसके लिए पत्नी ने अधिकार की मांग की थी।
मध्यस्थता केन्द्र में दंपति के साथ ही पायल के मायके पक्ष और ससुराल पक्ष की भी काउंसलिंग की गई। उन्हें समझाया गया कि पहले के कड़वे अनुभव के कारण पायल को एडजस्ट करने में परेशानी हो रही है। ऐसे में यदि परिवार उसे प्यार देगा तो स्थिति बदल जाएगी। इसके बाद परिवार भी 5 साल की बच्ची के नाम संपत्ति का एक हिस्सा करने को राजी हो गया।
पायल ( परिवर्तित नाम ) ने अपने पूर्व पति से तलाक लेने के बाद राजेश (परिवर्तित नाम ) से दूसरी शादी की। दंपति, पति के पैतृक घर में ही एक सेपरेट हिस्से में रहते थे। जबकि दूसरे हिस्से में राजेश की मां, उसके दोनों बच्चे और विधवा बहन रहती हैं। मामले में पति ने मध्यस्थता केन्द्र में आवेदन देकर सुलह की दरकार की थी। पति ने कहा कि पायल का आए दिन उसके घर वालों से झगड़ा होता था। हालांकि, बाद में वह कहती थी कि उसकी पहली शादी के अनुभवों के कारण वह सामंजस्य नहीं बैठा पा रही है।
पति ने कहा कि उसने पायल और अपने परिवार को समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब बात बनती नजर नहीं आई तो उसने अलग घर ले लिया एवं मां के घर के हिस्से में ताला लगा दिया। राजेश के मुताबिक इसके बाद भी कुछ ठीक नहीं हुआ। पायल को डर था कि घर के उस हिस्से पर कब्जा न हो जाए। उसका कहना था कि पैतृक घर को रिनोवेट करने में राजेश ने खर्च किया है तो उसका हिस्सा ज्यादा है। इसके अलावा उसे लगता था कि सास पति के पहले बच्चों को प्यार करती है क्योंकि दोनों लड़के हैं। इसके बाद पायल ने संपत्ति उसके नाम करने की जिद की और पहले पति से जन्मे बेटे के पास चली गई। बाद में जब बच्चों पर तनाव का असर नजर आने लगा तो पति को चिंता हुई और उसने सुलह की पहल की।