विश्व की सबसे अधिक कमाई करने वाली कंपनियों की लिस्ट में टेक दिग्गजों का नाम सबसे ऊपर आता है। लेकिन अगर मुनाफे की बात की जाए तो सऊदी अरामको का दबदबा सबसे ज्यादा है। स्टैटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में कंपनी ने लगभग 247.43 बिलियन अमेरिकी डॉलर का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। मुनाफे का यह आंकड़ा कई बड़ी टेक कंपनियों के संयुक्त लाभ के बराबर माना जा रहा है।
सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ अरामको है। निसंदेह ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। कंपनी 2019 में शेयर बाजार में टाईअप हुई थी, लेकिन आज भी इसकी अधिकांश हिस्सेदारी सऊदी सरकार के पास ही है। इसके सरकार के पास 81 प्रतिशत से अधिक शेयर हैं, जबकि (PIF) के पास भी इस कंपनी की बड़ी हिस्सेदारी मौजूद है।
सऊदी अरामको विश्व की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनियों में से एक है। कंपनी प्रतिदिन लगभग 9 से 12 मिलियन बैरल (90 लाख से 1.2 करोड़ बैरल) कच्चे तेल का उत्पादन करती है। इसके उत्पादन का स्तर ओपेक+ के फैसलों और वैश्विक मांग के अनुसार बदलता रहता है। कंपनी के पास 250 अरब बैरल से अधिक तेल भंडार है, जो दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में से एक है। मांग के अनुसार अरामको की अधिकतम उत्पादन क्षमता 12 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि वैश्विक तेल बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।
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भारत के निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी Reliance Industries Limited और सऊदी अरामको के बीच दो दशक से अधिक पुराना कारोबारी रिश्ता है। रिलायंस ग्रुप के मालिक मुकेश अंबानी की जामनगर रिफाइनरी के लिए अरामको बड़ी मात्रा में कच्चा तेल उत्पादित करती रही है। जामनगर कॉम्प्लेक्स में औसतन 1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल प्रोसेस होता ही है, जिसमें अरामको अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। इस परस्पर सहयोगी संबंध ने दोनों कंपनियों के बीच रणनीतिक रिश्ते को भी मजबूत किया है। निसंदेह ही दोनों की साझेदारी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाई है।
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ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के दौरान सऊदी अरामको जैसी कंपनी पर किसी भी तरह का हमला केवल देश का मुद्दा नहीं बल्कि इसका सीधा असर पूरी दुनिया पर पड़ना तय है। तेल आपूर्ति बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की महंगाई पर पड़ेगा। ऐसे में अरामको की स्थिरता और उत्पादन क्षमता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम मानी जाती है। इससे साफ जाहिर है कि सऊदी अरामको केवल एक तेल कंपनी नहीं, बल्कि इसपर वैश्विक ऊर्जा संतुलन क्रेंदित भी है। वर्तमान दौर में इस तेल कंपनी की भूमिका और भी निर्णायक साबित होगी।