वक्फ संपत्तियों को किराए पर देने में ढाई करोड़ का गोलमाल, EOW ने पूर्व अध्यक्ष समेत तीन के खिलाफ दर्ज की FIR

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को नियम कायदे को ताक पर रख कर किराए पर देने में ढाई करोड रुपए से ज्यादा का गोलमाल सामने आया है। इस मामले में ईओडब्ल्यू ने बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष समेत तीन लोगों पर एफआईआर दर्ज की है।
Follow on Google News
वक्फ संपत्तियों को किराए पर देने में ढाई करोड़ का गोलमाल, EOW ने पूर्व अध्यक्ष समेत तीन के खिलाफ दर्ज की FIR
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल।  मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को नियम कायदे को ताक पर रख कर किराए पर देने में ढाई करोड रुपए से ज्यादा का गोलमाल हुआ। इस पर ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध विंग) ने वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन सहित तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके तलाश शुरू कर दी है। 

    उप सचिव ने सौंपी जांच रिपोर्ट

    दरअसल वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को किराए पर देने में गड़बड़ी के बारे में उप सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग ने ईओडब्ल्यू को बीते 27 जुलाई 2023 को मय जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों के शिकायत की थी। इसमें वक्फ बोर्ड की औकाफ आम्मा संपत्तियों को वक्फ अधिनियम 1995 और वक्फ संपत्ति पट्टा नियम 2014 का उल्लंघन करते हुए लीज पर देने के साथ ही बिना अनुमति निर्माण कार्य की मंजूरी भी दे दी गई। इस पर ईओडब्ल्यू ने 3 अक्टूबर 2023 को प्रारंभिक जांच शुरू की, जिसमें सामने आया कि प्रदेशभर में 185 संपत्तियों को किराये पर दिया गया, उनका क्षेत्रफल 83 हजार वर्गफुट है। कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार इन संपत्तियों की कीमत करीब 59 करोड़ रुपए से ज्यादा थी। ऐसे में नियमों के मुताबिक इनसे हर साल 2 करोड़ 98 लाख रुपये किराया मिलना चाहिए था। बावजूद सिर्फ 21 लाख रुपए ही किराया मिला।

    नियमों की जानबूझकर अनदेखी की गई

    वक्फ बोर्ड ने 14 अगस्त 2013 को आगामी पांच वर्षों के लिए 11 सदस्यीय इंतजामिया कमेटी औकाफ आम्मा, भोपाल का गठन किया था। इसके अध्यक्ष शौकत मोहम्मद खान और सचिव फुरकान अहमद और मोहम्मद जुबेर बनाए गए थे। इस समिति के गठन आदेश में शर्तें थीं कि वक्फ बोर्ड की अनुमति के बिना किसी भी वक्फ संपत्ति को न तो लीज पर दिया जा सकता है, न बेचा जा सकता है, न ही किसी अन्य रूप में हस्तांतरित किया जा सकता है। साथ ही वक्फ संपत्ति में कोई स्थायी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। बावजूद 2013 से 2018 के बीच, वक्फ बोर्ड की 185 संपत्तियों में किरायेदारी बदली गई। इसको कागजों में किरायेदारी परिवर्तन बताया गया, जबकि असलियत में पुराने किरायेदारों को हटाकर नए लोगों को नए पट्टे (लीज) दिए गए। यह बिना सार्वजनिक सूचना, बिना आवेदन और बिना वक्फ बोर्ड की स्वीकृति के किए गए। जहां नियमों के अनुसार पहले पुरानी किरायेदारी को सरेंडर कर नई प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी, वहां सीधे नाम बदलकर संपत्तियां दे दी गईं। कुछ मामलों में किरायेदारी बदलने के लिए रक्त संबंध (ब्लड रिलेशन) का आधार भी दिखाया गया, जो जांच में सही नहीं पाया गया।

    इन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर

    ईओडब्ल्यू ने जांच पूरी होने के बाद तत्कालीन वक्फ बोर्ड चेयरमैन शौकत मोहम्मद सहित फुरकान अहमद और मोहम्मद जुबेर के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की है। 

    गिरफ्तारी की कोशिशें जारी

    वक्फ संपत्तियों के किराएदारों को गलत तरीके से हटाकर किराए की आड़ में करोड़ों की गड़बड़ी पर वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन और दो अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगी हुई हैं। 
    अरुण मिश्रा, एसपी, ईओडब्ल्यू, भोपाल

    Vijay S. Gaur
    By Vijay S. Gaur

    विजय एस. गौर, पीपुल्स समाचार में रीजनल एडीटर हैं। साथ ही राजनीति, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, खेती-किसानी,...Read More

    नई दिल्ली
    --°
    बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
    Source:AccuWeather
    icon

    Latest Posts