इंदौर — शहर में दूषित पानी की समस्या अब खतरनाक और भयावह रूप लेती जा रही है। भगीरथपुरा में जहरीले पानी से मचे हड़कंप और लोगों की जान जाने जैसी घटनाओं के बाद भी नगर निगम ने कोई सबक नहीं लिया। अब निपानिया क्षेत्र में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि नलों से आ रहा काला और बदबूदार पानी लोगों की सेहत पर सीधा हमला बन गया है। रहवासियों का आरोप है कि इस गंदे पानी के कारण घरों में त्वचा रोग (स्किन डिजीज) फैलने लगे हैं, लेकिन निगम के दावे आज भी “साफ पानी सप्लाई” तक ही सीमित हैं।
सूंघने पर बदबू घंटों तक हाथों से नहीं जाती -
जमीनी हकीकत यह है कि पानी की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि उसे हाथ में लेकर सूंघने पर बदबू घंटों तक हाथों से नहीं जाती। रहवासी मजबूरी में उसी पानी से नहा रहे हैं, खाना बना रहे हैं और घरेलू काम कर रहे हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद निगम की कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित नजर आ रही है। चेम्बर खोलकर गाद निकलवाने की औपचारिकता की जा रही है, जबकि समस्या जस की तस बनी हुई है। पार्षद को शिकायत किए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन न तो पानी साफ हुआ और न ही बदबू कम हुई।
“इतना गंदा पानी हाथ में ले लिया तो खाना नहीं खा पाऊंगा,
शनिवार सुबह तुलसी नगर-निपानिया क्षेत्र में पानी जांचने पहुंची निगम टीम के सामने ही व्यवस्था की पोल खुल गई। जब रहवासियों ने एक कर्मचारी से घर में आ रहे पानी को हाथ में लेकर सूंघने को कहा तो उसने साफ शब्दों में मना कर दिया और कहा — “इतना गंदा पानी हाथ में ले लिया तो खाना नहीं खा पाऊंगा, इसकी बदबू जाती ही नहीं।” सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस पानी को निगम कर्मचारी छूने से बच रहे हैं, उसी पानी का इस्तेमाल क्षेत्र के लोग कई दिनों से नहाने और घरेलू उपयोग में करने को मजबूर हैं।
पानी पीना तो दूर, नहाने लायक भी नहीं बचा
भगीरथपुरा की दूषित पानी त्रासदी ने पूरे शहर को झकझोर दिया था और उम्मीद थी कि जल आपूर्ति व्यवस्था पर सख्त निगरानी होगी, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट दिखाई दे रही है। होली जैसे बड़े त्योहार से पहले नगर निगम मानो शहरवासियों को “सौगात” के रूप में काला और बदबूदार पानी दे रहा है। अब हाल यह है कि नलों से आने वाला पानी पीना तो दूर, नहाने लायक भी नहीं बचा और लोगों में त्वचा संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
सिर्फ कहने का पॉश इलाका -
पॉश इलाकों में गिने जाने वाले तुलसी नगर और आसपास के क्षेत्रों में भी स्थिति बदतर हो चुकी है। सामने बड़े मॉल बन रहे हैं, ऊंची हाईराइज इमारतें खड़ी हो चुकी हैं और पासपोर्ट ऑफिस खुलने से क्षेत्र की पहचान बढ़ी है, लेकिन मूलभूत सुविधा यानी साफ पानी आज भी सपना बनी हुई है। रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम को केवल टैक्स वसूली से मतलब है। बकाया होते ही निगम की पीली गैंग घर पहुंच जाती है, लेकिन जब नागरिक साफ पानी मांगते हैं तो उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं होता।
स्थानीय लोगों के मुताबिक नलों से रोजाना नाले जैसा काला और दुर्गंधयुक्त पानी आ रहा है। कपड़े धोना, नहाना और खाना बनाना तक जोखिम भरा हो गया है। कई परिवार मजबूरी में बाजार से पानी खरीदने लगे हैं। शिकायतों का अंबार लगाने के बावजूद अधिकारियों की ओर से केवल आश्वासन मिल रहे हैं। कई बार तो अधिकारियों द्वारा यह तक कह दिया गया कि “नर्मदा कनेक्शन कटवा लो”, जिससे रहवासियों में भारी आक्रोश है और निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।