Punjab Politics :पंजाब कांग्रेस में बगावत के सुर, चन्नी के घर बनी इस्तीफे की रणनीति?

नेशनल डेस्क। पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनाए जाने से उनके समर्थकों में भारी नाराजगी है। इसी मुद्दे पर चन्नी के मोरिंडा स्थित आवास पर बड़ी बैठक आयोजित की गई, जिसमें करीब 65 कांग्रेस नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में पांच मौजूदा विधायक भी मौजूद रहे। चन्नी समर्थकों ने स्पष्ट संकेत दिए कि वे अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। पार्टी हाईकमान को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
कई वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक हुए शामिल
चन्नी के आवास पर हुई बैठक में विधायक तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, राणा गुरजीत सिंह, सुख सरकारिया, लाड़ी शेरोवालिया और कुलदीप सिंह ढिल्लों सहित कई प्रमुख नेता पहुंचे। इसके अलावा पूर्व उपमुख्यमंत्री ओपी सोनी, गुरप्रीत सिंह कांगड़, भारत भूषण आशु, गुरकीरत सिंह कोटली, दर्शन सिंह बराड़, लखवीर सिंह लखा, मदनलाल जलालपुर, अंगद सिंह सैनी, हरमिंदर सिंह गिल, कुशलदीप सिंह किक्की ढिल्लों समेत करीब 15 पूर्व विधायक और पूर्व सांसद मोहम्मद सादिक भी बैठक में शामिल हुए। नेताओं की इस बड़ी मौजूदगी को कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
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हाईकमान से पुनर्विचार की मांग
बैठक के बाद तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने कहा कि उनका कांग्रेस हाईकमान से कोई टकराव नहीं है, लेकिन संगठन से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर गंभीर आपत्तियां हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को नेताओं की चिंताओं को सुनना चाहिए और संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहिए। बैठक में पंजाब यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बरिंदर सिंह ढिल्लों और दिवंगत गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह भी पहुंचे। नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य पार्टी को कमजोर करना नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत करना है।
चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की आवाज
बैठक में शामिल नेताओं का मानना था कि कांग्रेस यदि पंजाब में दोबारा मजबूत होना चाहती है तो चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। पूर्व विधायक दर्शन सिंह बराड़ ने कहा कि चन्नी के नेतृत्व में ही पार्टी राज्य में प्रभावी वापसी कर सकती है। उनका दावा था कि यदि नेतृत्व परिवर्तन नहीं हुआ तो कांग्रेस को आगामी चुनावों में नुकसान उठाना पड़ सकता है।












