रेलवे स्टेशन पर रहने वालों का क्यों तैयार होगा डिजिटल रिकॉर्ड? जानिए 'ऑपरेशन हमदर्द' क्या है

जीआरपी द्वारा शुरू किया गया यह अभियान 1 जुलाई से 31 जुलाई तक पूरे मध्य प्रदेश में चलाया जाएगा। इसके तहत रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की 20 बिंदुओं पर जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी। अभियान के पहले ही दिन करीब 150 लोगों का रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि यह पहल सुरक्षा और सामाजिक पुनर्वास, दोनों उद्देश्यों को ध्यान में रखकर शुरू की गई है।
एक महीने तक चलेगा विशेष अभियान
बताया जा रहा है कि 'ऑपरेशन हमदर्द' पूरे प्रदेश में 1 जुलाई से 31 जुलाई तक संचालित किया जा रहा है। जीआरपी की टीमें अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर पहुंचकर वहां रहने वाले लोगों की जानकारी ले रही हैं। अभियान के पहले दिन ही लगभग 150 बेसहारा लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया। आने वाले दिनों में यह संख्या लगातार बढ़ने की संभावना है।
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20 बिंदुओं पर तैयार होगी डिजिटल प्रोफाइल
अभियान के तहत प्रत्येक व्यक्ति की 20 महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जा रही हैं। इसमें नाम, उम्र, स्थायी और वर्तमान पता, आधार नंबर, मोबाइल नंबर, परिवार का संपर्क, आजीविका का साधन, स्टेशन पर रहने की अवधि, साथ रहने वाले लोगों की जानकारी और आपराधिक रिकॉर्ड जैसी सूचनाएं शामिल हैं। इसके अलावा नशे की आदत और उससे जुड़ी जानकारी भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाई जा रही है।
सुरक्षा के साथ पुनर्वास पर भी रहेगा फोकस
जीआरपी का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना नहीं है। पुलिस जरूरतमंद और बेसहारा लोगों की पहचान कर उन्हें पुनर्वास योजनाओं से जोड़ने का भी प्रयास है। इससे सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों तक सरकारी सहायता पहुंचाने में मदद मिलेगी।
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संदिग्ध गतिविधियों पर होगी सख्त कार्रवाई
अभियान के दौरान पुलिस रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले लोगों से पूछताछ भी करेगी। यदि जांच में किसी गिरोह, सिंडिकेट या अन्य आपराधिक गतिविधि से संबंध सामने आता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। तैयार किए गए सभी डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएंगे, ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग किया जा सके।












