ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर :मोजतबा खामेनेई बने देश के सर्वोच्च नेता, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने लिया फैसला

अमेरिका-इजरायल हमले में अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान को नया सुप्रीम लीडर मिल गया है। ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने मोजतबा खामेनेई को देश का सर्वोच्च नेता चुना है।
Follow on Google News
मोजतबा खामेनेई बने देश के सर्वोच्च नेता, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने लिया फैसला
Iran New Supreme Leader Mojtaba Khamenei
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    ईरान में जारी युद्ध और राजनीतिक संकट के बीच देश को नया सुप्रीम लीडर मिल गया है। ईरान की ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ (विशेषज्ञों की सभा) ने अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुना है। इस फैसले के साथ ही ईरान के शीर्ष नेतृत्व की कमान अब उनके हाथों में आ गई है।

    हमले में हुई थी अली खामेनेई की मौत

    अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद देश में शीर्ष पद खाली हो गया था और नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

    विशेषज्ञों की सभा ने लिया फैसला

    ईरान के संविधान के अनुसार सुप्रीम लीडर का चयन ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ करती है। लंबे विचार-विमर्श के बाद इस परिषद ने मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुनने का फैसला लिया।

    ये भी पढ़ें: ईरान युद्ध के बीच ट्रंप का बड़ा दावा : अगर हमने हमला न किया होता तो वह पहले अटैक कर देते, स्पेन से व्यापारिक रिश्ते करेंगे खत्म

    मोजतबा खामेनेई के बारे में जानें?

    मोजतबा हुसैनी खामेनेई का जन्म 8 सितंबर 1969 को ईरान के मशहद में हुआ था। वे अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं। उन्होंने धार्मिक शिक्षा ग्रहण की और मौलवी बने। इसके बाद उन्होंने कुम सेमिनरी में इस्लामिक धर्मशास्त्र पढ़ाया, जहां उन्होंने धार्मिक शिक्षक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका व्यक्तित्व काफी रहस्यमयी है और वे सार्वजनिक भाषण बहुत कम देते हैं।

    सैन्य और IRGC अनुभव

    मोजतबा खामेनेई ने 1987 में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में शामिल होकर ईरान-इराक युद्ध के दौरान सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने सेना और सिक्योरिटी सिस्टम के अंदर मजबूत संपर्क बनाए। समय के साथ उनके संबंध सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ धार्मिक और राजनीतिक नेताओं तक भी फैल गए। 2000 के दशक की शुरुआत तक उनका नेटवर्क काफी प्रभावशाली हो चुका था, जिसने उन्हें ईरान की सत्ता व्यवस्था के सबसे मजबूत और प्रभावशाली दावेदारों में शामिल कर दिया।

    यह भी पढ़ें: 'तेरा खून रंग लाएगा'! खामेनेई की मौत पर लखनऊ से श्रीनगर तक गूंजे नारे

    राजनीतिक और पारिवारिक कनेक्शन

    मोजतबा खामेनेई की शादी जहरा हद्दाद-आदेल से हुई, जो ईरान के पूर्व संसद अध्यक्ष के परिवार से ताल्लुक रखती हैं। यह विवाह उनके राजनीतिक कनेक्शन को और मजबूत करता है। इस दंपति के तीन बच्चे हैं, जो भविष्य में भी ईरान की राजनीति से जुड़े रहने की संभावना रखते हैं।

    मोजतबा की राजनीतिक गतिविधियां और विवाद

    मोजतबा खामेनेई ने कभी भी किसी सरकारी पद को संभाला नहीं, लेकिन उनकी राजनीतिक भागीदारी लगातार बढ़ती रही है। 2005 और 2009 के राष्ट्रपति चुनावों में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद का समर्थन किया। 2009 में हुए विरोध प्रदर्शन, जिन्हें बाद में ग्रीन मूवमेंट कहा गया, को दबाने में उनकी अहम भूमिका रही। आलोचक उन पर सरकारी धन के दुरुपयोग और सत्ता के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाते हैं। मोजतबा सार्वजनिक रूप से बहुत कम भाषण देते हैं, लेकिन कहा जाता है कि वे ईरान की खुफिया और सरकारी एजेंसियों में अपने समर्थकों के माध्यम से महत्वपूर्ण फैसलों पर प्रभाव डालते हैं।

    यह भी पढ़ें: US-Israel Iran Conflict : ईरानी सेना के चीफ-ऑफ-स्टाफ मौसावी की मौत, कराची में अमेरिकी दूतावास पर हमला

    अली खामेनेई का जीवन और सत्ता का सफर

    अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939, मशहद में हुआ। वे शाह के शासन के खिलाफ विरोध में सक्रिय हुए और 1979 की ईरानी क्रांति में प्रमुख चेहरा बने।

    • 1981 में राष्ट्रपति बने और आठ साल तक इस पद पर रहे।
    • 1989 में रुहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद उन्हें ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया।
    • उन्होंने 37 साल तक ईरान की सर्वोच्च सत्ता संभाली।

    उनके शासनकाल में ईरान ने न्यूक्लियर प्रोग्राम, बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट और क्षेत्रीय प्रभाव को मजबूत किया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन्हें कट्टर और सख्त शासन चलाने का आरोप देते हैं।

    ईरान की राजनीतिक संरचना: पांच सबसे ताकतवर संस्थाएं

    रहबर (Supreme Leader): सरकार, सेना, समाज और विदेश नीति पर अंतिम निर्णय।

    असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स: 88 धर्मगुरु जो रहबर का चुनाव और निगरानी करते हैं।

    राष्ट्रपति: सरकार चलाते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय रहबर का होता है।

    गार्डियन काउंसिल: 6 धर्मगुरु और 6 जज; संसद के कानून रोक सकते हैं।

    संसद: 290 सदस्य; कानून बनाती है और राष्ट्रपति या मंत्रियों पर कार्रवाई कर सकती है।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

    नई दिल्ली
    --°
    बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
    Source:AccuWeather
    icon

    Latest Posts