कौन हैं DSP अमीषा?आगरा में ACP बनते ही सुलझाया बाथरूम हत्याकांड, पिता रह चुके हैं IPS

आगरा के चर्चित बाथरूम मर्डर केस में पत्नी रूबी शर्मा ने पति की हत्या कर शव को बाथरूम में दफनाकर ऊपर पक्का फर्श बनवा दिया। खुद गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई, लेकिन एसीपी अमीषा की जांच में पूरा राज खुल गया। जानिए इस सनसनीखेज हत्याकांड और डीएसपी अमीषा की सफलता की पूरी कहानी।
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आगरा में ACP बनते ही सुलझाया बाथरूम हत्याकांड, पिता रह चुके हैं IPS
डीएसपी अमीषा

उत्तर प्रदेश के आगरा में सामने आए बाथरूम मर्डर केस ने सभी को चौंका दिया। सिकंदरा थाना क्षेत्र में पत्नी ने अपने पति की हत्या कर उसका शव घर के बाथरूम में दफना दिया और ऊपर से पक्का फर्श बनवा दिया। करीब डेढ़ महीने तक किसी को इस वारदात की भनक नहीं लगी। आखिरकार पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा किया और 4 जुलाई 2026 को आरोपी पत्नी रूबी शर्मा को जेल भेज दिया। इस जटिल केस को आगरा की सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) अमीषा और उनकी टीम ने सुलझाया। यह उनके पुलिस करियर का पहला बड़ा हत्या का मामला था।

पहली पोस्टिंग में मिला सबसे मुश्किल केस

एसीपी अमीषा 2022 बैच की डीएसपी हैं। उन्होंने 14 फरवरी 2025 को आगरा में सहायक पुलिस आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था। उन्होंने बताया कि यह उनकी पहली पोस्टिंग है और ऐसा मामला उन्होंने पहली बार देखा, जिसमें पत्नी ने पति की हत्या कर शव को घर के बाथरूम में दफना दिया।

पत्नी ने खुद लिखवाई थी गुमशुदगी की रिपोर्ट

26 मई 2026 को रूबी शर्मा अपने देवर अनिल शर्मा के साथ सिकंदरा थाने पहुंची और पति सुरेंद्र शर्मा की गुमशुदगी दर्ज कराई। उसने पुलिस को बताया कि उसका पति अचानक लापता हो गया है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। एसीपी अमीषा खुद मौके पर पहुंचीं और रूबी, पड़ोसियों व रिश्तेदारों से पूछताछ की। शुरुआत में किसी को भी रूबी पर शक नहीं हुआ, क्योंकि वह सामान्य व्यवहार कर रही थी और पति की तलाश में भी पुलिस का साथ देने का दिखावा कर रही थी।

भरतपुर की घटना बनी जांच की पहली कड़ी

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि 15-16 मई को सुरेंद्र शर्मा राजस्थान के भरतपुर में रिश्तेदारी में गया था। वहां उसने शराब के नशे में झगड़ा किया था। रिश्तेदारों ने इसकी शिकायत रूबी से भी की थी और पुलिस में रिपोर्ट करने की बात कही थी। इसके बाद सुरेंद्र घर लौट आया, लेकिन 18 मई से अचानक गायब हो गया। जब भी कोई उसके बारे में पूछता, रूबी कहती कि वह किसी काम से बाहर गया है।

डिजिटल सबूत नहीं थे, इसलिए जांच बनी चुनौती

एसीपी अमीषा ने बताया कि इस केस में मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड, चैट या किसी प्रेम प्रसंग जैसा कोई डिजिटल सुराग नहीं था। यही वजह थी कि जांच काफी कठिन हो गई। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि असली आरोपी खुद पुलिस की मदद करने का नाटक कर रही थी। वह इस मामले की इकलौती गवाह भी थी और वही हत्यारोपी भी।

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घरेलू हिंसा बनी पुलिस की सबसे बड़ी लीड

पुलिस जांच में सामने आया कि सुरेंद्र शर्मा कोई काम नहीं करता था। वह शराब पीकर अक्सर पत्नी रूबी के साथ मारपीट करता था। घर का खर्च उसकी मां की पेंशन से चलता था। जब पुलिस को लगातार घरेलू हिंसा की जानकारी मिली, तो शक रूबी पर गहराने लगा। पूछताछ में पहले वह पुलिस को गुमराह करती रही, लेकिन सख्ती होने पर उसने पूरी वारदात कबूल कर ली।

खाने में मिलाईं 20 नींद की गोलियां

पूछताछ में रूबी ने बताया कि भरतपुर की घटना के बाद उसे डर था कि पुलिस केस होगा और कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इसी डर में उसने सुरेंद्र के खाने में 15 से 20 नींद की गोलियां मिला दीं। जब वह गहरी नींद में सो गया, तब उसकी हत्या कर दी।

शव को बाथरूम में दफनाकर ऊपर बनवा दिया पक्का फर्श

हत्या के बाद रूबी ने शव को बाथरूम में घसीटकर रखा। अगले दिन उसने मजदूरों से मिट्टी मंगवाई, लेकिन शक से बचने के लिए मिट्टी घर के अंदर नहीं बल्कि बाहर सड़क पर उतरवाई। इसके बाद वह बाल्टी से मिट्टी अंदर ले जाती रही और शव को पूरी तरह मिट्टी में दबा दिया। फिर एक राजमिस्त्री को बुलाकर उसी जगह पर पक्का फर्श बनवा दिया। क्योंकि शव ज्यादा पुराना नहीं था, इसलिए किसी को बदबू भी नहीं आई और हत्या का राज करीब डेढ़ महीने तक छिपा रहा।

एसीपी अमीषा की सफलता की कहानी

इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करने वाली एसीपी अमीषा का सफर भी प्रेरणादायक है। उनका जन्म 12 मई 1997 को लखनऊ में हुआ। उनके पिता विनोद कुमार सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में अधिकारी रहे और वर्ष 2022 में डीआईजी जेल के पद से सेवानिवृत्त हुए। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद अमीषा ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की तैयारी की। सबसे पहले उनका चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ। 

इसके बाद उन्होंने पुलिस सेवा में आने का सपना पूरा किया और 2022 में डीएसपी बनीं। नायब तहसीलदार रहते हुए भी उन्होंने आगरा में काम किया था। बाद में उनकी पहली पुलिस पोस्टिंग आगरा ग्रामीण में हुई और फरवरी 2026 में उन्होंने आगरा शहर में एसीपी का कार्यभार संभाला।

पहली बड़ी जांच में हासिल की बड़ी सफलता

एसीपी अमीषा ने अपनी पहली बड़ी हत्या की जांच में धैर्य, सूझबूझ और लगातार पूछताछ के दम पर इस ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा किया। जिस पत्नी ने खुद पति की गुमशुदगी दर्ज कराकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, आखिरकार वही पुलिस जांच में आरोपी साबित हुई और अब जेल में है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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