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नई शुरुआत :किसी ने अमरूद लगाए, किसी ने आम, मजदूरी छोड़कर खुद का रोजगार कर रहीं गांव की महिलाएं

एक बगिया मां के नाम से प्रदेश की अनेक महिलाओं को फायदा मिल रहा है। भोपाल जिले की 160 से ज्यादा महिलाओं ने आत्मनिर्भर बनने की शुरुआत की है।
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किसी ने अमरूद लगाए, किसी ने आम, मजदूरी छोड़कर खुद का रोजगार कर रहीं गांव की महिलाएं
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    ब्रजेंद्र वर्मा, भोपाल

    एक बगिया मां के नाम परियोजना भोपाल सहित प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के चेहरों पर मुस्कान बिखेर रही है। भोपाल जिले की करीब 160 ग्रामीण महिलाओं ने अपने खेतों में बगिया विकसित की  है, जिनमें ड्रैगन फ्रूट, आम, अमरूद सहित अन्य फलदार पौधे लगाए हैं। पीपुल्स समाचार ऐसी ग्रामीण महिलाओं के बारे में बता रहा है, जो घर का काम कर मजदूरी करने भी जाती थीं, लेकिन अब वे स्वरोजगार की तरफ कदम बढ़ा रही हैं।

    यह है योजना

    स्व सहायता समूह की महिलाओं को समृद्ध बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बगिया मां के नाम परियोजना 15 अगस्त 2025 में शुरू की। इसके तहत स्व-सहायता समूह की महिलाओं की आधा व एकड़ निजी जमीन पर फलोद्यान की बगिया लगा कर आत्मनिर्भर बनाना है। एक बगिया मां के नाम ऐप पर पंजीयन कराया है। पौधे, खाद, गड्ढे खोदने के साथ ही पौधों की सुरक्षा के लिए कटीले तार की फेंसिंग और सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए सरकार महिलाओं की आर्थिक मदद करती है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य गांवों की महिलाओं को स्व-रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

    आत्मनिर्भरता के उदाहरण

    एक : भोपाल जिले की ग्राम पंचायत दिल्लौद की ओमवती बाई भी इसी परियोजना से जुड़ी हैं। उन्हें अमरूद की खेती करने के लिए शासन की ओर से 2.82 लाख की आर्थिक मदद मिली है। इन्होंने अपनी एक एकड़ जमीन पर 100 अमरूद के पौधे लगाए हैं। वे बताती हैं कि पहले मजदूरी के लिए बाहर जाना पड़ता था, अब हमारी बगिया ही हमारा रोजगार का साधन बनेगी। 

    दो : भानपुर केकड़िया गांव की मंजू बाई ने अपने खेत की करीब 1 एकड़ जमीन पर हाईब्रिड आम के 100 पौधे लगाए हैं। उन्होंने बताया कि मनेरगा के तहत बगिया विकसित करने के लिए दो लाख से अधिक आर्थिक मदद मिली। इनके बेटे प्रेम दोहरे बताते हैं कि कृषि विशेषज्ञों की मदद से आम की अच्छी किस्म के पौधे लगाए हैं। उनका कहना है कि जब गांव में ही रोजगार मिल जाएगा तो बाहर हम क्यों जाएंगे। 

    तीन : भानपुर केकड़िया की काली बाई स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। मनरेगा के तहत ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के लिए 2.80 लाख रुपए  शासन की ओर से मिले। करीब 1 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती करना शुरू कर दिया है।

    महिलाएं आर्थिक रूप से समृद्ध बनेंगी

    भोपाल जनपद पंचायत की सीईओ शिवानी मिश्रा ने कहा कि एक बगिया मां के नाम परियोजना से ग्रामीण महिलाएं जुड़ रही हैं। ऐसी महिलाएं जो मजदूरी करती थीं, अब उन्होंने अपनी बगियों में फलदार पौधे लगाए हैं। फलों का उत्पादन होने से महिलाएं स्व-रोजगार से जुड़ेंगी और आर्थिक रूप से समृद्ध बनेंगी। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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