अमेरिका के मशहूर जज फ्रैंक कैप्रियो का 88 साल की उम्र में निधन, लंबी बीमारी के बाद ली अंतिम सांस; दयालु जज के नाम से थे फेमस

वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के मशहूर जज फ्रैंक कैप्रियो का बुधवार को निधन हो गया। वे 88 साल के थे और लंबे समय से पैंक्रियाटिक कैंसर से जूझ रहे थे। उनके परिवार ने सोशल मीडिया पर उनकी मौत की जानकारी दी। कैप्रियो अपने टीवी कोर्ट शो ‘कॉट इन प्रोविडेंस’ से दुनियाभर में पहचाने गए। इस शो में उनकी इंसानियत और दयालुता भरे फैसलों ने उन्हें सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में लोकप्रिय बना दिया।
इंसाफ में दया का अनोखा अंदाज
फ्रैंक कैप्रियो को अक्सर “दुनिया का सबसे दयालु जज” कहा जाता था। वजह साफ थी- वे अपने कोर्टरूम में सिर्फ कानून की किताब से फैसले नहीं करते थे, बल्कि उसमें इंसानियत और संवेदना को भी शामिल करते थे।
- गरीब परिवारों के ट्रैफिक चालान माफ करना
- बीमार बेटे को ले जा रहे बुजुर्ग का जुर्माना हटाना
- संघर्ष कर रही अकेली मां की आर्थिक मदद करना
- बच्चों को फैसले का हिस्सा बनाकर उन्हें न्याय का महत्व समझाना
ऐसे कई फैसले उनके न्याय को औरों से अलग बनाते रहे।
टीवी शो से मिली विश्व प्रसिद्धि
‘कॉट इन प्रोविडेंस’ शो 2018 से 2020 तक प्रसारित हुआ और इसे कई बार डेटाइम एमी अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेशन मिला। इस शो के वीडियो सोशल मीडिया पर अरबों बार देखे गए।
इसी शो के जरिए लोग उन्हें सिर्फ एक जज नहीं, बल्कि दयालु इंसान के रूप में जानने लगे। इंस्टाग्राम पर उनके 34 लाख फॉलोअर्स थे और उनके कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें वे कोर्ट में हंसी-मजाक और मानवीयता से भरे फैसले देते दिखाई देते थे।
रोड आइलैंड ने जताया शोक
फ्रैंक कैप्रियो का जन्म प्रोविडेंस, रोड आइलैंड में हुआ था। उनके निधन पर रोड आइलैंड के गवर्नर ने उन्हें राज्य का “सच्चा खजाना” बताया। सम्मान में राज्यभर में झंडे आधे झुका दिए गए। साथ ही प्रोविडेंस म्यूनिसिपल कोर्ट का नाम बदलकर “द चीफ जज फ्रैंक कैप्रियो कोर्टरूम” रखा गया।
न्यायपालिका को दिए 38 साल
कैप्रियो ने 1985 से 2023 तक अमेरिका की न्यायपालिका में सेवा दी। वे लंबे समय तक चीफ म्युनिसिपल जज रहे। इस दौरान उन्होंने लाखों लोगों के मामले सुने और अपनी न्यायपूर्ण व मानवीय शैली से अलग पहचान बनाई।
उनका पारिवारिक जीवन भी उतना ही समर्पित रहा। वे एक अच्छे पति, पिता, दादा और परदादा के रूप में याद किए जाएंगे। उनकी पत्नी जॉयस ई. कैप्रियो के साथ उनका रिश्ता 60 साल तक रहा।
राजनीति और शिक्षा से भी जुड़े रहे
न्यायिक जीवन से पहले वे 1962 से 1968 तक प्रोविडेंस सिटी काउंसिल के सदस्य रहे। 1970 में उन्होंने अटॉर्नी जनरल का चुनाव भी लड़ा था। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया और बोस्टन की लॉ यूनिवर्सिटी में ‘कैप्रियो स्कॉलरशिप फंड’ स्थापित किया।
अंतिम दिनों तक लोगों से जुड़े रहे
दिसंबर 2023 में उन्हें पैंक्रियाटिक कैंसर हुआ था। मई 2024 में उन्होंने कीमोथेरेपी और रेडिएशन का कोर्स पूरा किया, लेकिन उम्र संबंधी दिक्कतों के कारण वे स्वस्थ नहीं हो पाए। निधन से कुछ दिन पहले ही उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर लोगों से दुआओं की अपील की थी।
इंसाफ की दुनिया में हमेशा रहेंगे याद
फ्रैंक कैप्रियो का जीवन और फैसले इस बात का सबूत हैं कि न्याय सिर्फ सख्ती से नहीं, बल्कि दयालुता और इंसानियत से भी दिया जा सकता है। उनके फैसले आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देंगे कि कानून और करुणा साथ-साथ चल सकते हैं।
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