US-Iran War: मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ब्रिटेन ने अपनी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए अमेरिका को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमलों और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है। ब्रिटेन के इस कदम को पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते सैन्य समन्वय के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही यह आशंका भी बढ़ गई है कि मध्य पूर्व का संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।
ब्रिटेन की सरकार ने शुक्रवार को पुष्टि की है कि, अमेरिकी सेना ईरान के उन मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ब्रिटिश सैन्य अड्डों का इस्तेमाल कर सकेगी, जिनका उपयोग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमला करने के लिए किया जा रहा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार ने पहले इसी तरह के अनुरोध को ठुकरा दिया था। उस समय ब्रिटेन ने कहा था कि, किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले अंतरराष्ट्रीय कानून और कानूनी औचित्य का स्पष्ट होना जरूरी है।
ब्रिटेन सीधे तौर पर इस युद्ध में शामिल होने से बचना चाहता था, लेकिन हाल ही में ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में ब्रिटिश सहयोगियों और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की घटनाओं के बाद लंदन ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि, यह कदम सामूहिक आत्मरक्षा के सिद्धांत के तहत उठाया गया है।
यह भी पढ़ें: ईरान का अमेरिका पर बड़ा अटैक, अमेरिकी बेस डिएगो गार्सिया पर दागी लंबी दूरी की मिसाइलें
ब्रिटेन ने अमेरिका को दो महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी है।
1. RAF फेयरफोर्ड (RAF Fairford)
यह ब्रिटेन के ग्लॉस्टरशायर में स्थित एक महत्वपूर्ण एयरबेस है। यहां अमेरिका के भारी बमवर्षक विमानों की तैनाती होती है और यह यूरोप में अमेरिकी वायु अभियानों के लिए बेहद अहम माना जाता है।
2. डिएगो गार्सिया (Diego Garcia)
हिंद महासागर में चागोस द्वीप समूह में स्थित यह संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से लंबी दूरी के बमवर्षक विमान और नौसैनिक अभियान संचालित किए जाते हैं।
इन दोनों ठिकानों से अमेरिकी सेना ईरान के उन मिसाइल सिस्टम और सैन्य ढांचे को निशाना बना सकती है जो जहाजों के लिए खतरा बन रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है। खाड़ी देशों से निकलने वाली गैस और तेल की आपूर्ति के लिए यह जीवनरेखा है। एशिया, यूरोप और अमेरिका के ऊर्जा बाजार इससे सीधे जुड़े हैं। हाल के दिनों में यहां जहाजों पर हमलों और तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
[featured type="Featured"]
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ब्रिटेन की आलोचना करते हुए उसे निराश करने वाला सहयोगी बताया था। ट्रंप का कहना था कि, ईरान के साथ संघर्ष के दौरान ब्रिटेन ने पर्याप्त सहयोग नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा था कि, अमेरिका को इस युद्ध में जीत के लिए किसी की मदद की जरूरत नहीं है, लेकिन जो सहयोग नहीं करेगा, उसे भविष्य में याद रखा जाएगा। इसके बाद ब्रिटेन के इस फैसले को कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि ब्रिटेन ने अमेरिका को सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी है, लेकिन साथ ही उसने तनाव कम करने की अपील भी की है। डाउनिंग स्ट्रीट ने अपने बयान में कहा कि, क्षेत्र में तत्काल तनाव कम करने की जरूरत है। युद्ध को जल्द खत्म करने के प्रयास किए जाने चाहिए, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना जरूरी है। ब्रिटेन ने स्पष्ट किया कि, उसका उद्देश्य सीधे युद्ध में शामिल होना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
यह भी पढ़ें: Iran-Israel War: मिसाइल क्षमता पर आमने-सामने दावे, ईरान बोला- जंग के बीच भी जारी है प्रोडक्शन
ब्रिटेन के इस फैसले पर ईरान ने नाराजगी जाहिर की है। ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने कहा कि ब्रिटेन की जनता इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहती, लेकिन सरकार ने उनकी भावनाओं की अनदेखी की है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि, ईरान अपने आत्मरक्षा के अधिकार का पूरा उपयोग करेगा। अगर उसके ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया तो जवाब और भी कड़ा होगा। अमेरिका और उसके सहयोगियों के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। इस बयान से साफ है कि, आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है।
[breaking type="Breaking"]
इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत युद्ध से पहले करीब 72 डॉलर प्रति बैरल थी। हालिया हमलों के बाद यह बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। फिलहाल कीमत घटकर करीब 107 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर होर्मुज में तनाव और बढ़ता है तो तेल की कीमतें फिर तेजी से बढ़ सकती हैं।
ईरान के साथ जारी संघर्ष अब 21वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान भी लगातार सुर्खियों में रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि, वे युद्ध को खत्म करने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि वे युद्धविराम नहीं चाहते। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की निगरानी अन्य देशों को करनी चाहिए। उन्होंने NATO सहयोगियों की भी आलोचना करते हुए उन्हें कायर बताया और कहा कि अमेरिका के बिना उनकी कोई ताकत नहीं है।
यह भी पढ़ें: ईरान को एक और झटका : इजरायली हमले में IRGC प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी की मौत, युद्ध को लेकर दिया था बड़ा बयान
हाल के दिनों में संघर्ष और गंभीर हो गया जब इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने कतर के गैस ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों के बाद पूरी दुनिया में ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।