Naresh Bhagoria
8 Jan 2026
नई दिल्ली। अमेरिका में सार्वजनिक हुए फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के दस्तावेजों से एक अहम खुलासा हुआ है। इन दस्तावेजों के मुताबिक, पिछले साल अप्रैल में भारत के चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान बुरी तरह घबरा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हालात बिगड़ते देख पाकिस्तान ने जंग रुकवाने के लिए अमेरिका का सहारा लिया।
इसके लिए उसने अमेरिका में तैनात अपने राजनयिकों के जरिए जोरदार लॉबिंग शुरू कर दी। पाकिस्तानी डिप्लोमैट्स ने अमेरिका के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों, सांसदों, पेंटागन और विदेश विभाग के अफसरों से करीब 60 बार संपर्क किया।
FARA के तहत अमेरिकी न्याय विभाग में जमा रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल के अंत से लेकर ऑपरेशन सिंदूर के चार दिन पूरे होने के बाद तक पाकिस्तान लगातार संघर्ष विराम की कोशिश करता रहा। इस दौरान ईमेल, फोन कॉल और आमने-सामने बैठकों के जरिए बातचीत जारी रही।
जहां इसमें पाकिस्तान ने हमले को रूकवाने के लिए अमेरिका में शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों, सांसदों, पेंटागन और विदेश विभाग के अफसरों के साथ करीब 60 बार संपर्क किया था।पाकिस्तान की कोशिश थी कि किसी भी तरह अमेरिका भारत पर दबाव बनाए और युद्ध रुक जाए। इसके लिए उसने तत्कालीन ट्रम्प प्रशासन तक पहुंच बनाने, व्यापार और कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने के उद्देश्य से 6 अमेरिकी लॉबिंग फर्मों को करीब 45 करोड़ रुपये दिए।
इसी बीच अमेरिकी लॉबिंग फर्म SHW पार्टनर्स LLC ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि भारत ने भी अमेरिका में अपनी कूटनीतिक पहुंच मजबूत करने के लिए फर्म की सेवाएं ली थीं। भारतीय दूतावास ने अमेरिकी सरकार और अधिकारियों से संवाद बढ़ाने के लिए पेशेवर लॉबिंग का रास्ता अपनाया। कुल मिलाकर, FARA दस्तावेज साफ दिखाते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके बाद अमेरिका में भारत-पाकिस्तान दोनों ही देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर जबरदस्त हलचल रही।
वहीं इस संबंध में भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अमेरिका में संपर्क और संवाद बढ़ाने के लिए सिर्फ सरकारें ही नहीं, बल्कि दूतावास, निजी कंपनियां और व्यावसायिक संगठन भी लॉबिंग फर्मों और कंसल्टेंट्स की सेवाएं लेते हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय दूतावास भी 1950 के बाद से जरूरत के हिसाब से ऐसी फर्मों के साथ अनुबंध करता आया है। इसका मकसद अमेरिकी प्रशासन और संस्थाओं के साथ बेहतर तालमेल और संवाद बनाए रखना होता है।
विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि अमेरिका में डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के तहत फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के अंतर्गत विदेशी सरकारों की ओर से लॉबिंग करना पूरी तरह कानूनी, पारदर्शी और स्थापित प्रक्रिया है।