फिटनेस प्लेटो एक आम स्थिति है, जिससे लगभग हर व्यक्ति गुजरता है। इसे तोड़ने के लिए वर्कआउट में बदलाव, प्रोग्रेसिव ओवरलोड, सही डाइट और पर्याप्त आराम बेहद जरूरी हैं। अगर सही तरीके अपनाए जाएं, तो रुकी हुई फिटनेस प्रोग्रेस को फिर से ट्रैक पर लाया जा सकता है।
जब आप पहली बार एक्सरसाइज शुरू करते हैं तो शरीर पर नया दबाव पड़ता है और तेजी से बदलाव दिखते हैं। लेकिन धीरे-धीरे शरीर उसी रूटीन का आदी हो जाता है और कम मेहनत में वही काम करने लगता है। इस स्थिति को फिटनेस प्लेटो कहा जाता है, जहां आपकी मेहनत जारी रहती है लेकिन रिजल्ट धीमे या पूरी तरह रुक जाते हैं। मसल्स भी उसी वर्कआउट के साथ एडजस्ट होकर कम कैलोरी बर्न करती हैं, जिससे बदलाव नजर नहीं आता।
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उम्र बढ़ने के साथ शरीर में हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं, खासकर 30 के बाद। टेस्टोस्टेरोन और ग्रोथ हार्मोन कम होने से मसल्स बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, वहीं स्ट्रेस बढ़ने पर कॉर्टिसोल शरीर पर नकारात्मक असर डालता है। इसके अलावा, एक ही तरह का वर्कआउट लंबे समय तक करते रहना भी प्रोग्रेस रोक देता है। जब शरीर को नई चुनौती नहीं मिलती, तो वह बदलने की कोशिश भी नहीं करता और आप कंफर्ट जोन में फंस जाते हैं।
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अक्सर लोग एक्सरसाइज पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन रिकवरी को नजरअंदाज कर देते हैं। नींद की कमी, ज्यादा स्ट्रेस और पानी की कमी मसल्स रिकवरी को प्रभावित करते हैं, जिससे प्रदर्शन गिरता है। सही न्यूट्रिशन भी बेहद जरूरी है। पर्याप्त प्रोटीन न मिलने से मसल्स ग्रोथ रुक जाती है, वहीं विटामिन और मिनरल्स की कमी शरीर को थका हुआ महसूस कराती है। हल्की कमी भी लंबे समय में असर डाल सकती है।