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UN रिपोर्ट में भारत पर आरोप!इजराइल से संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन तोड़े, नैतिक जिम्मेदारी का भी जिक्र

अल्बानीज ने कहा कि भारत केवल कानूनी रूप से ही नहीं, बल्कि नैतिक रूप से भी इस मुद्दे से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि भारत का ऐतिहासिक रूप से न्याय और मानवाधिकारों पर मजबूत रुख रहा है
इजराइल से संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन तोड़े, नैतिक जिम्मेदारी का भी जिक्र

वॉशिंगटन डीसी। संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में भारत पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजराइल के साथ भारत के बढ़ते रक्षा और रणनीतिक संबंधों के चलते उसकी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारियां बनती हैं, जिन पर सवाल उठ सकते हैं। यह रिपोर्ट टॉर्चर एंड जेनोसाइड नाम से जारी की गई है और इसे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पेश किया गया।

UN स्पेशल दूत ने लगाए गंभीर आरोप

रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र  UN की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज ने 23 मार्च को पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत और इजराइल के बीच घनिष्ठ रक्षा सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत की जिम्मेदारियों के खिलाफ जा सकता है। उनके अनुसार, अगर कोई देश ऐसे संघर्ष में शामिल पक्ष को सैन्य सहयोग देता है, तो वह भी अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही के दायरे में आ सकता है।

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हथियार व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कानून पर सवाल

रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के उस निर्देश का हवाला दिया गया है, जिसमें इजराइल के कब्जे को अवैध बताया गया है और देशों से हथियारों के लेन-देन रोकने की अपील की गई है। इसके बावजूद यदि कोई देश सैन्य सामग्री या तकनीकी सहयोग जारी रखता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।

भारत की नैतिक जिम्मेदारी पर टिप्पणी

अल्बानीज ने कहा कि भारत केवल कानूनी रूप से ही नहीं, बल्कि नैतिक रूप से भी इस मुद्दे से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि भारत का ऐतिहासिक रूप से न्याय और मानवाधिकारों पर मजबूत रुख रहा है, लेकिन वर्तमान नीतियां उस छवि से अलग दिखाई दे रही हैं।

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गाजा में हालात पर रिपोर्ट के दावे

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अक्टूबर 2023 के बाद गाजा में हालात बेहद खराब हो गए हैं। इसमें कहा गया है कि वहां व्यवस्थित रूप से हिंसा और यातना का इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्ट ने गाजा को “विशाल यातना क्षेत्र” की तरह बताया है, जहां आम नागरिकों का जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

निगरानी तकनीक पर भी गंभीर आरोप

रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल जेलों में ही नहीं, बल्कि बाहर भी फिलिस्तीनियों पर निगरानी बढ़ाई गई है। ड्रोन, फेस रिकग्निशन सिस्टम, चेकपॉइंट्स और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए उनके जीवन को नियंत्रित किया जा रहा है, जिससे उनकी रोजमर्रा की आजादी सीमित हो रही है।

भारत-इजराइल साझेदारी पर फोकस

रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा और दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख भी किया गया है। अल्बानीज का कहना है कि यह साझेदारी अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन और मानवाधिकार व्यवस्था पर असर डाल सकती है।

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इजराइल की कार्रवाई पर तीखी आलोचना

फ्रांसेस्का अल्बानीज ने कहा कि इजराइल की ओर से की जा रही सैन्य कार्रवाई को किसी भी हाल में जायज नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर खुलकर बोलने और हस्तक्षेप करने की अपील की।

उन्होंने भारत के लोगों से भी अपील की कि वे इस मुद्दे पर सवाल उठाएं और सरकार से जवाब मांगें। उनके अनुसार, मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चुप्पी उचित नहीं है और वैश्विक स्तर पर जवाबदेही जरूरी है। यह रिपोर्ट आने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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