Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

मिट्टी, लोहा और पीतल के बर्तन: क्या पुरानी रसोई लौटने से सेहत सुधरेगी

नॉन-स्टिक और एल्युमिनियम की जगह पारंपरिक बर्तनों को अपनाने के आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक फायदे। इस बात की पुष्टि आयुर्वेद के साथ-साथ मॉडर्न साइंस भी करती है कि कुकवेयर का मटेरियल भोजन की गुणवत्ता तय करता है।
 मिट्टी, लोहा और पीतल के बर्तन: क्या पुरानी रसोई लौटने से सेहत सुधरेगी
पीतल के बर्तन

मुंबई। आज की मॉडर्न किचन में हेवी-बॉटम और एडवांस कुकवेयर ने हमारी रसोई से पारंपरिक बर्तनों को लगभग गायब कर दिया है। इस बदलाव ने सिर्फ बर्तनों को नहीं बदला बल्कि हमारे खाना पकाने के तरीकों और खाने की पौष्टिकता को भी प्रभावित किया है। शोध बताते हैं कि नॉन-स्टिक पैन और एल्युमिनियम के बर्तन खाने में वह नमी बरकरार नहीं रख पाते, जो मिट्टी के बर्तनों में प्राकृतिक रूप से बनी रहती है। भोजन में नमी और पोषक तत्वों का यह संतुलन सेहत के लिए बेहद अहम है। हमारे प्राचीन ग्रंथ सुश्रुत संहिता में इस बात का स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि भोजन पकाने और संग्रहित करने के लिए इस्तेमाल होने वाला पात्र हमारे पाचन तंत्र, इम्युनिटी और जल शुद्धिकरण की प्रक्रिया को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। इस बात की पुष्टि आज आयुर्वेद के साथ-साथ मॉडर्न साइंस भी करती है कि कुकवेयर का मटेरियल भोजन की गुणवत्ता तय करता है।

मिट्टी के चूल्हों पर बनाते थे खाना, पकता था धीमी आंच में

पुराने दौर में मिट्टी के चूल्हों पर लकड़ी की आंच में खाना बनता था, जिसमें एक अलग ही स्वाद और पौष्टिकता होती थी। अब हमने भले ही सुविधाजनक मॉडर्न बर्तनों को अपना लिया, लेकिन अब आपको सेहत और सुविधा में से एक को चुनने की मजबूरी नहीं है।आप अपनी रसोई में छोटे-छोटे बदलाव करके एक बड़ा सुधार ला सकते हैं। बाजार में अब मिट्टी के मॉडर्न और टिकाऊ बर्तन उपलब्ध हैं, जिनमें आप अपने परिवार की पारंपरिक और पौष्टिक रेसिपीज को फिर से बना सकते हैं। सेहतमंद रसोई के लिए स्टेनलेस स्टील के नॉन-स्टिक कोटिंग वाले पैन, एल्युमिनियम के बर्तन, सिंथेटिक अलॉय और सिलिकॉन या प्लास्टिक के बर्तनों की जगह धीरे-धीरे मिट्टी, लोहे और पीतल जैसे पारंपरिक बर्तनों पर लौटना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।

क्यों अच्छे हैं लोहे, मिट्टी और पीतल के बर्तन

मिट्टी, लोहा और पीतल के बर्तनों को दोबारा अपनाने के पीछे कई ठोस वजहें हैं। सबसे बड़ी वजह है इनकी टिकाऊपन, ये पारंपरिक बर्तन एक-दो साल नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक साथ निभाते हैं, जो इन्हें मॉडर्न कुकवेयर की तुलना में कहीं ज्यादा किफायती और सस्टेनेबल बनाता है। बर्तन का चुनाव सिर्फ खाना पकाने का साधन नहीं, बल्कि खाने के स्वाद और टेक्सचर को तय करने वाला अहम कारक है। आप किस बर्तन में और किस विधि से पका रहे हैं, इसका सीधा असर भोजन पर पड़ता है। धीमी आंच पर पकाने से ही इन पारंपरिक बर्तनों में खाने का असली स्वाद और सुगंध उभर कर आती है।

भोजन में प्राकृतिक नमी को बरकरार रखता है मिट्टी का बर्तन

मिट्टी के बर्तन का सबसे बड़ा हेल्थ बेनिफिट है, नमी को लॉक करने की क्षमता। दाल, चावल और धीमी आंच पर बनने वाली करी या सब्जियों के लिए यह नेचुरल मॉइश्चर (प्राकृतिक नमी) बहुत जरूरी है। इससे न सिर्फ स्वाद कई गुना बढ़ जाता है, बल्कि खाने के पोषक तत्व भी नष्ट नहीं होते।

शरीर के कार्यों को बेहतर बनाते हैं पीतल के बर्तन

पीतल के बर्तनों में खाना पकाने पर इसमें मौजूद तांबा (Copper) और जस्ता (Zinc) जैसे सूक्ष्म तत्व भोजन में मिल जाते हैं। ये तत्व इम्युनिटी को मजबूत करने, मेटाबॉलिज्म को बैलेंस करने और पाचन क्रिया में सुधार करने में सहायक होते हैं।आयुर्वेद के अनुसार, पीतल के बर्तन शरीर की अतिरिक्त गर्मी को संतुलित करने में भी मदद करते हैं और भोजन के लगभग 85 प्रतिशत पोषक तत्वों को सुरक्षित बनाए रखते हैं।

आयरन कैसे करता है सेहत को बेहतर

शरीर के सभी सामान्य कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए आयरन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे शरीर को मेटाबॉलिज्म और आयरन के अवशोषण (Absorption) के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखना पड़ता है। जब खानपान में पर्याप्त आयरन नहीं मिलता, तो यह संतुलन बिगड़ जाता है। इससे शरीर में आयरन की कमी हो सकती है और एनीमिया जैसी स्थिति बन सकती है।

पारंपरिक बर्तन सेहत के लिए कैसे लाभकारी हैं

जब आप लोहे की कड़ाही या पैन में सही तापमान पर भोजन पकाते हैं, तो आपके खाने में आयरन की मात्रा प्राकृतिक रूप से बढ़ जाती है। खाने में कितना आयरन समाहित होगा, यह कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है - जैसे पकाने का तापमान, बर्तन का प्रकार और भोजन की अम्लीय प्रकृति (pH लेवल)। यह तरीका आयरन की कमी को दूर करने का एक असरदार और प्राकृतिक उपाय है। लेकिन, यह ध्यान रखना जरूरी है कि जिन्हें एनीमिया के कारण बहुत अधिक आयरन की आवश्यकता होती है। उन्हें डॉक्टर की सलाह पर आयरन सप्लीमेंट लेना चाहिए।

पीतल के बर्तन और जल शुद्धिकरण की प्राचीन परंपरा

प्राचीन ग्रंथ सुश्रुत संहिता में रोगों से बचाव के लिए पीने के पानी को चांदी और तांबे के बर्तनों में संग्रहित करने के लाभों का विस्तार से वर्णन है। पीतल, तांबे से बनी एक मिश्र धातु (Alloy) है और इससे बने बर्तनों का उपयोग भी पानी को स्टोर करने के लिए किया जा सकता है। प्लास्टिक की पानी की बोतलों की तुलना में पीतल और तांबे के बर्तन कहीं बेहतर विकल्प माने जाते हैं। क्योंकि, प्लास्टिक की बोतलें पानी में हानिकारक केमिकल्स छोड़ सकती हैं, जबकि पारंपरिक धातु के बर्तन पानी को शुद्ध और सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

Latest Posts