जालोर में खुलासा! 8वीं पास व्यक्ति बना 50 बेड के अस्पताल का मालिक, SOG ने किया गिरफ्तार

राजस्थान। जिले के रानीवाड़ा स्थित भास्कर हॉस्पिटल को लेकर सामने आए मामले ने चिकित्सा व्यवस्था और डॉक्टरों के पंजीयन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि आठवीं तक पढ़ाई करने वाले नानजीराम ने कथित फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में अपना पंजीयन कराया। इसके बाद वह करीब 50 बेड वाले अस्पताल का मालिक बन गया। जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2023 में राजस्थान मेडिकल काउंसिल में जमा कराए गए दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। SOG ने इस मामले में नानजीराम को गिरफ्तार किया है। अब पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
आठवीं पास से अस्पताल मालिक बनने तक का मामला
रानीवाड़ा के भास्कर हॉस्पिटल से जुड़ा यह मामला इसलिए चर्चा में है, क्योंकि आरोपी नानजीराम की पढ़ाई और उसके डॉक्टर के रूप में पंजीयन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि वह पहले इसी अस्पताल में मरीजों की पर्चियां काटने का काम करता था। बाद में उसने अस्पताल खरीद लिया और उसका मालिक बन गया। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि अस्पताल का मालिक बनने से लेकर डॉक्टर के रूप में काम करने तक की पूरी प्रक्रिया कैसे हुई।
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MBBS और गायनेकोलॉजी डिप्लोमा के दस्तावेजों पर सवाल
जांच में नानजीराम के नाम से जमा कराए गए MBBS और गायनेकोलॉजी डिप्लोमा से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। आरोप है कि ये दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी थे। बताया जा रहा है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वर्ष 2023 में राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराया गया था। जांच एजेंसी अब दस्तावेजों की असलियत और उन्हें जारी करने वाले संस्थानों से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
स्त्री रोग विशेषज्ञ बनकर ऑपरेशन करने का आरोप
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि नानजीराम ने स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में काम किया और ऑपरेशन भी किए। यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल में इलाज की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। फिलहाल जांच एजेंसी आरोपी की शैक्षणिक योग्यता, पंजीयन और अस्पताल में उसकी भूमिका से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
राजस्थान मेडिकल काउंसिल की भूमिका भी जांच के घेरे में
SOG अब केवल आरोपी के दस्तावेजों तक सीमित नहीं है बल्कि पंजीयन की पूरी प्रक्रिया की जांच भी कर रही है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गलत दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन कैसे हुआ और उस समय किन स्तरों पर जांच की गई थी।
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जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
इस मामले में अब कई अहम सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, पंजीयन के दौरान उनकी जांच कैसे हुई और अस्पताल के संचालन में किन लोगों की भूमिका रही, इन सभी बिंदुओं पर जांच जारी है। SOG की पड़ताल और संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर साफ होगी। फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अस्पताल और डॉक्टरों के पंजीयन से जुड़ी व्यवस्था पर भी चर्चा तेज हो गई है।




















