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2 महीनों में टमाटर के रेट 10 गुना तक गिरे, 80 से हुआ 8-10 रु. प्रति किलो

व्यापारी बोले-प्रदेश में अप्रैल तक सस्ते दामों में उपलब्ध रहेगा टमाटर
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2 महीनों में टमाटर के रेट 10 गुना तक गिरे, 80 से हुआ 8-10 रु. प्रति किलो

नरेन्द्र सिंह-जबलपुर। 2 महीने पहले तक 80 रुपए किलो बिकने वाला टमाटर इन दिनों 8 से 10 रुपए किलो तक बाजार में मिल रहा है। यह स्थिति आने वाले 4 महीनों तक बनी रहने की संभावना है। दरअसल भारी आवक के चलते यह स्थिति निर्मित हुई है। मई से अक्टूबर तक जिन किसानों के खेतों में टमाटर की फसल हुई, वे लाखों रुपए कमा चुके हैं, लेकिन अक्टूबर से अब तक अधिक आवक के चलते टमाटर के रेट 10 गुना तक नीचे आ चुके हैं। टमाटर की जोरदार आवक के चलते कीमतों में जबर्दस्त गिरावट आई है। आगे और भी दामों में मंदी की संभावना बताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि पूरे प्रदेश में अप्रैल माह तक टमाटर सस्ते दामों में उपलब्ध होता रहेगा, ऐसा दावा व्यापारियों और किसानों के द्वारा किया जा रहा है। दाम कम होने से किसानों को गाड़ी भाड़ा, मजदूरी, तुड़ाई खर्च पूरा करने के लिए मुश्किलें आ रही हैं। लोगों के घरों, ढाबों, होटलों में गर्मियां शुरू होने के पहले अप्रैल माह तक टमाटर सस्ता मिलता रहेगा। फिलहाल तो किसानों को गाड़ी भाड़ा, मजदूरी, तुड़ाई, बीज, दवाई, खाद का खर्च निकलने में ही मुश्किलें आ रही हैं।

इतनी आती है लागत

किसानों के अनुसार एक कैरेट पर 80 से 90 रुपए लागत आती है। जाहिर है कि नुकसान तो हो रहा है, लेकिन मंडी तक लाकर माल बेचना मजबूरी बन चुकी है अन्यथा टमाटर खेत में ही खराब हो जाएगा। अप्रैल के बाद नए टमाटर की फसल की आवक शुरू होगी उसके बाद ही टमाटर की कीमतों में बढ़ोत्तरी होगी। बताया जा रहा है कि गर्मियों में टमाटर की आवक 2 से 3 हजार कट्टे ही होती है। ठंड के मौसम में टमाटर की खपत कम हो जाती है, क्योंकि कम रेट में ही पर्याप्त हरी सब्जियां उपलब्ध होती हैं।

अच्छी आवक से भाव गिरे

व्यापारियों के अनुसार मई से अक्टूबर तक 15 सौ से 2 हजार रुपए प्रति कैरेट तक भाव पहुंच गए थे। नवंबर-दिसंबर में ठंड शुरू होते ही जोरदार आवक शुरू होने से दाम 5 सौ से 7 सौ रुपए तक पहुंच गए। गौरतलब है कि कैरेट में 20 किलो टमाटर बनते हैं। जनवरी माह में जोरदार ठंड के चलते टमाटर के दाम में यह गिरावट आई है।

मुसीबत में किसान

टमाटर की फसल दो तरह से लगाई जाती है। एक तो जमीन में सीधे और दूसरे प्रकार में बांस- बल्लियों पर बेल को चढ़ाई जाती है। जमीन पर फसल लगाने वाले किसानों को लागत कम पड़ती है लेकिन इसमें टमाटर जल्दी खराब होता है। वहीं स्टोरेज में भी दिक्कतें आती हैं। यही वजह है कि इसकी मांग कम होती है। जमीन से ऊपर लगाने वाला टमाटर लंबे समय तक चलता है।

थोक में 5 से 7 रुपए किलो

इन दिनों टमाटर की भारी आवक से दाम औंधे मुंह गिरे हैं। थोक में 60 से 100 रुपए किलो मिलने वाला अच्छा टमाटर अब 5 से 7 रुपए तक मिल रहा है जो कि फुटकर में 8 से 15 रुपए किलो बिक रहा है। यह स्थिति अप्रैल तक बनी रहने की संभावना है। -शिवराज सिंह पटेल, अध्यक्ष,फुटकर सब्जी व्यापारी संघ, जबलपुर

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