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किसानों को रुला रहा टमाटर, दाम गिरकर पहुंचे 3-4 रुपए किलो, न लागत निकल रही न भाड़ा

जबलपुर की मंडी में सिवनी, छपारा सहित आसपास के जिलों से टमाटर की फसल पहुंचती है। टमाटर का उत्पादन बढ़ने और दाम कम होने से किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। जबलपुर मंडी में टमाटर के दाम 3-4 रुपए किलो है।
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किसानों को रुला रहा टमाटर, दाम गिरकर पहुंचे 3-4 रुपए किलो, न लागत निकल रही न भाड़ा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जितेंद्र चंद्रवंशी, जबलपुर। 'मैंने 2 एकड़ खेत में टमाटर की फसल लगाई है। शुरुआत में अच्छी कीमत मिली। अब यही टमाटर जबलपुर मंडी में 3- 4 रुपए किलो बिक रहा है। जिससे न तो लागत निकल रही है और न भाड़ा। ऐसे में टमाटर मवेशियों को खिला रहे हैं, गरीबों को दे रहे है और खेतों में छोड़ रहे हैं।' यह पीड़ा है सिवनी जिले के छपारा के किसान पवन पटेल की। इसी तरह लखनादौन तहसील के किसान भागीरथ ने बताया कि जिले सहित आसपास क्षेत्रों में टमाटर के दाम घटकर महज 3-4 रुपए किलो हो गए हैं। ऐसे में किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। 

    एक एकड़ में आती है 1 से 1.50 लाख लागत

    किसानों के अनुसार, 1 एकड़ में टमाटर लगाने में 1 से 1.50 लाख रुपए का खर्च आता है। शुरुआत में टमाटर 20-40 रुपए किलो तक बिका। इससे प्रॉफिट मिला, लेकिन अब टमाटर 3-4 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। स्थिति यह है कि किसान को खेत से तुड़ाई और परिवहन का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

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    टमाटर का रकबा

    • जबलपुर- 3,910 हेक्टेयर
    • सिवनी- 1,382 हेक्टेयर
    • छिंदवाड़ा- 10,695 हेक्टेयर
    • बालाघाट- 710 हेक्टेयर
    • कटनी- 3,114 हेक्टेयर
    • मंडला- 643 हेक्टेयर
    • नरसिंहपुर- 194.50 हेक्टेयर                                                                                                   (कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार)

     फैक्ट फाइल

    • तुड़ाई का खर्च 250 रुपए प्रति व्यक्ति प्रति दिन
    • परिवहन खर्च 4-5 हजार रुपए प्रतिदिन
    • 26 किलो के 1 कैरेट का मूल्य 70-80 रुपए मिल रहा
    • जबलपुर मंडी में प्रतिदिन टमाटर की आवक लगभग 35-40 टन

    व्यापारियों को नई फसल का इंतजार

    व्यापारी बिज्जू कुशवाहा ने बताया कि कृषि उपज मंडी जबलपुर में प्रतिदिन 30 से 35 टन टमाटर की आवक हो रही है। किसानों को फसल का दाम 3-4 रुपए किलो मिल रहा है। पहले उन्हें अच्छा दाम मिला लेकिन अब फसल जैसे-जैसे पुरानी होती जा रही है दाम कम हो रहे हैं। अब नई फसल आएगी तो रेट पुन: बढ़ते जाएंगे।

    फसल बाजार ले जाने में भी नुकसान

    टमाटर के दाम इस कदर गिर गए हैं कि बाजार तक फसल ले जाना भी घाटे का सौदा हो गया है। 3-4 रुपए किलो के भाव में ना मजदूरी निकल रही है और न ही परिवहन खर्च। कई बार तो मंडी में टमाटर बेचने से अच्छा उसे खेत में ही छोड़ देना पड़ रहा है।

    संतोष साहू, किसान

    दाम गिरने से हालत खराब हो गई

    शुरूआत में 20-30 रुपए किलो तक भाव मिला था, जिससे थोड़ी राहत थी, लेकिन अब दाम गिरने से हालत खराब हो गई हैं। लागत बहुत ज्यादा है और आमदनी बिल्कुल नहीं हो रही। सरकार को किसानों के लिए समर्थन मूल्य या कोई राहत योजना लागू करनी चाहिए, ताकि नुकसान की भरपाई हो सके।

    मोहन लाल उइके, किसान 

    मजदूरी का खर्च भी नहीं निकल रहा

    एक एकड़ टमाटर की खेती में डेढ़ से दो लाख रुपए तक खर्च आता है। अभी 3-4 रुपए किलो के भाव में तुड़ाई और मजदूरी का खर्च भी नहीं निकल रहा। रोजाना परिवहन में हजारों रुपए लगते हैं। ऐसे में हमें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, सरकार को सब्जी स्टोरेज करने की उचित व्यवस्था करनी चाहिए।

    रामकिशोर धुर्वे, किसान 

    दाम कम हों तो टमाटर का पावडर बनाएं

    टमाटर की फसल को स्टोरेज नहीं किया जा सकता इसके लिए कोई स्टोरेज प्लांट नहीं है। किसानों को जागरूक होने की आवश्यकता है, जब तक टमाटर के भाव अच्छे हैं बाजार में बेचें। दाम कम हो तो टमाटर का पावडर बना लेना चाहिए। इसके लिए जागरुकता अभियान भी चल रहा है।

    शेखर सिंह बघेल, प्रभारी कृषि विज्ञान केन्द्र सिवनी

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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