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TMC में टूट के बीच ममता का बड़ा फैसला :कल्याण बनर्जी को लोकसभा में चीफ व्हीप नियुक्त किया, ओम बिरला को लिखा था लेटर

बागी सांसदों की ओर से काकोली घोष दस्तीदार को अपना चीफ व्हिप चुना गया है। काकोली ने लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजकर बागी सांसदों के लिए अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है।
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कल्याण बनर्जी को लोकसभा में चीफ व्हीप नियुक्त किया, ओम बिरला को लिखा था लेटर

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक संकट के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को सांसद कल्याण बनर्जी को लोकसभा में नया चीफ व्हिप नियुक्त कर दिया। ममता ने इस संबंध में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र भेजकर नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब TMC के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत का दावा किया है और NDA सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है।

बागी सांसदों ने अलग संसदीय ब्लॉक की मांग की

बागी सांसदों की ओर से काकोली घोष दस्तीदार को अपना चीफ व्हिप चुना गया है। काकोली ने लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजकर बागी सांसदों के लिए अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है।

काकोली पहले ही TMC छोड़ चुकी हैं, लेकिन उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा नहीं दिया है। उनका कहना है कि वह अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक हैं और लंबे समय तक ममता बनर्जी के साथ काम करती रही हैं।

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आखिर चीफ व्हिप की भूमिका क्या होती है?

चीफ व्हिप संसद में किसी राजनीतिक दल का प्रमुख अनुशासन प्रभारी होता है। उसकी जिम्मेदारी सांसदों को पार्टी की रणनीति और निर्देशों के अनुसार चलाना, महत्वपूर्ण मतदान के दौरान उपस्थिति सुनिश्चित करना और पार्टी लाइन का पालन कराना होती है। आदेश नहीं मानने वाले सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

TMC में क्यों है बगावत?

TMC के भीतर असंतोष केवल सांसदों तक सीमित नहीं है। इससे पहले 3 जून को पार्टी के 80 में से 58 विधायकों के अलग गुट बनाने का दावा भी सामने आ चुका है। ऐसे में यह संकट ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक रूप से बड़ा झटका माना जा रहा है।

राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों की वफादारी सत्ता तक ही सीमित रहती है। वहीं कल्याण बनर्जी ने कहा कि उनके पास पार्टी कार्यकर्ताओं और बंगाल की जनता का समर्थन है।

अब आगे क्या?

1. क्या बागी सांसदों पर दल-बदल कानून लागू होगा?

विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि 28 में से 20 सांसद एक साथ अलग समूह बनाते हैं, तो उनके पास दो-तिहाई से अधिक समर्थन होगा। ऐसे में संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उन्हें दल-बदल कानून से राहत मिल सकती है।

2. NDA को कितना फायदा होगा?

लोकसभा में NDA के पास फिलहाल 293 सांसदों का समर्थन है। यदि TMC के 20 सांसद औपचारिक रूप से NDA के साथ आते हैं, तो गठबंधन की संख्या 313 तक पहुंच सकती है। इससे केंद्र सरकार की संसदीय स्थिति और मजबूत होगी।

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क्यों अहम है यह मामला?

बंगाल की राजनीति में TMC लंबे समय से सबसे प्रभावशाली ताकत रही है। पहले विधायकों और अब सांसदों की बगावत ने पार्टी के अंदर नेतृत्व और संगठन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में लोकसभा स्पीकर का रुख और बागी सांसदों की कानूनी स्थिति इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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