Peoples Update Special :कलेक्टर की कुर्सी से आगे की जिंदगी: कोई बनाता है कढ़ी-चावल, कोई पढ़ता है धार्मिक ग्रंथ; कोई बेटे को बाइक से छोड़ता है स्कूल

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। जिला कलेक्टर का पद जितना जिम्मेदारियों से भरा होता है उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। सुबह से देर रात तक बैठकों, जनसुनवाई, कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों की समीक्षा और फील्ड विजिट में व्यस्त रहने वाले कलेक्टर भी अपनी निजी जिंदगी और परिवार के लिए समय निकालने की कोशिश करते हैं। कोई छुट्टी के दिन रसोई में खाना बनाता है, कोई धार्मिक ग्रंथ पढ़कर मानसिक शांति पाता है, तो कोई अपने बच्चे को खुद स्कूल छोड़ने जाता है। पीपुल्स समाचार ने प्रदेश के कुछ युवा कलेक्टरों से उनकी निजी दिनचर्या, शौक और परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय को लेकर बातचीत की।
बड़वानी कलेक्टर खाली समय में बनाती हैं कढ़ी-चावल
2016 बैच की आईएएस और बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह व्यस्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच भी फिटनेस और परिवार दोनों को प्राथमिकता देती हैं। आदिवासी क्षेत्रों में लगातार दौरे और कठिन पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलने के बावजूद वह नियमित रूप से जिम, रनिंग और योग करती हैं। उन्हें किताबें पढ़ना, संगीत सुनना, फोटोग्राफी, ट्रैकिंग और खेलकूद पसंद हैं। वह कई बुक क्लब की सदस्य भी हैं। परिवार के लिए समय निकालते हुए वह कई बार अपने हाथों से खाना भी बनाती हैं। उन्हें कढ़ी-चावल बनाना सबसे अधिक पसंद है।
बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह
इसके अलावा वह अपनी बेटी के साथ समय बिताती हैं, उसे पढ़ाती हैं और लिखना सिखाती हैं। तनाव दूर करने के लिए कभी अपनी पसंदीदा फिल्म या वेब सीरीज देखती हैं तो कभी परिवार के साथ लंबी बातचीत कर खुद को तरोताजा महसूस करती हैं।
मंडला कलेक्टर की सोशल मीडिया से दूरी, धार्मिक ग्रंथों से गहरा जुड़ाव
2017 बैच के आईएएस राहुल नामदेव धोटे, जो वर्तमान में मंडला के कलेक्टर हैं, अपनी पहली कलेक्टरी संभाल रहे हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद वे नियमित योग करते हैं। रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में उनका अधिकांश समय धार्मिक और सांस्कृतिक पुस्तकों के अध्ययन में गुजरता है। उन्हें विशेष रूप से श्रीमद्भागवत, उपनिषद और महर्षि वाल्मीकि की रचनाएं पढ़ना पसंद है। अध्यात्म में उनकी गहरी रुचि है।
मंडला कलेक्टर राहुल नामदेव
दिलचस्प बात यह है कि सोशल मीडिया के दौर में भी राहुल धोटे इससे पूरी तरह दूरी बनाए हुए हैं और किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नहीं रहते।
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बैतूल कलेक्टर बेटे को 10 साल पुरानी बाइक से छोड़ते हैं स्कूल
2017 बैच के आईएएस डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, जो पहली बार बैतूल के कलेक्टर बने हैं, परिवार के साथ बिताए छोटे-छोटे पलों को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं। उन्हें बचपन से संगीत सुनने का शौक है। खाली समय में वे किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और अरिजीत सिंह के गीत सुनना पसंद करते हैं। आज भी वे अपने बेटे को 10 साल पुरानी बाइक से खुद स्कूल छोड़ने जाते हैं। उनका मानना है कि परिवार के साथ बिताया गया समय सबसे बड़ी पूंजी है।
डॉ. सौरभ संजय सोनवणे
डॉ. सोनवणे पिछले 18 महीनों से सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर हैं। समय मिलने पर वे ट्रैवलिंग करते हैं और हर साल कम से कम एक बार स्कूल के पुराने दोस्तों के साथ घूमने का कार्यक्रम जरूर बनाते हैं। स्वास्थ्य को लेकर भी वे बेहद सजग हैं और रोजाना लगभग एक घंटा जिम और योग के लिए निकालते हैं।
व्यस्त जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की मिसाल
प्रदेश के इन युवा कलेक्टरों की दिनचर्या यह बताती है कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच भी निजी जीवन, परिवार, स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन के लिए समय निकालना संभव है। यही छोटी-छोटी आदतें उन्हें तनाव से दूर रखती हैं और बेहतर तरीके से प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने की ऊर्जा देती हैं।












