STF की बड़ी कार्रवाई!नेपाल बॉर्डर से TMC नेता जहांगीर खान गिरफ्तार, विदेश भागने की थी योजना

पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार रहे जहांगीर खान को राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार, जहांगीर को नेपाल बॉर्डर के पास से पकड़ा गया। वह काफी समय से फरार चल रहा था और पुलिस उसकी तलाश में लगातार जुटी हुई थी।
जहांगीर खान का नाम विधानसभा चुनाव के दौरान काफी चर्चा में रहा था। चुनाव खत्म होने के बाद से ही वह गायब था और उसके खिलाफ कई मामलों की जांच चल रही थी। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर बंगाल की राजनीति गरमा गई है।
फालता में प्रभावशाली नेता के रूप में थी पहचान
फालता विधानसभा क्षेत्र में जहांगीर खान को एक प्रभावशाली और दबंग नेता माना जाता था। स्थानीय राजनीति में उसकी अच्छी पकड़ बताई जाती थी। हालांकि, उस पर कई गंभीर आरोप भी लगते रहे हैं। विरोधी दलों और स्थानीय लोगों का आरोप था कि उसका गिरोह इलाके में लोगों को डराने-धमकाने का काम करता था। चुनाव के दौरान भी उसके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। हालांकि, इन आरोपों की कानूनी जांच अभी भी जारी है।
पुलिस अधिकारी को चुनौती देने के बाद बढ़ा था विवाद
चुनाव के दौरान जहांगीर खान उस समय सबसे ज्यादा सुर्खियों में आया था, जब उसने कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी को खुलेआम चुनौती दी थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इस मामले ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया था। विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए थे। भाजपा समेत कई दलों ने आरोप लगाया था कि राजनीतिक संरक्षण के कारण ऐसे नेताओं के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं होती।
चुनाव से पहले लगे थे कई गंभीर आरोप
चुनावी प्रक्रिया के दौरान भी जहांगीर खान विवादों में घिरा रहा। उस पर मतदाता सूची से जुड़े मामलों में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को प्रभावित करने की कोशिश की गई और मृत लोगों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखने का प्रयास हुआ।
लोगों को धमकाने के आरोप भी आए सामने
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने भी चुनाव के दौरान जहांगीर खान के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनके मुताबिक, क्षेत्र में मतदाताओं को डराने और दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने विशेष निगरानी बढ़ा दी थी। आयोग ने उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस अधिकारी अजय पाल शर्मा को विशेष पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया था ताकि चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराया जा सके।
EVM विवाद के बाद दोबारा हुआ था चुनाव
फालता विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दौरान कई विवाद सामने आए थे। चुनाव के दिन कुछ ईवीएम मशीनों पर सेलोटेप लगाए जाने की शिकायतें मिली थीं। इस मामले ने पूरे राज्य में राजनीतिक बहस छेड़ दी थी।
विपक्षी दलों ने इस घटना के लिए जहांगीर खान और उसके समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने फालता क्षेत्र के कुछ हिस्सों में दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया था।
चुनाव से दो दिन पहले वापस ले ली थी उम्मीदवारी
जहांगीर खान ने मतदान से ठीक दो दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी। इस फैसले ने सभी को चौंका दिया था। उस समय उसने कहा था कि वह फालता में शांति, विकास और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना चाहता है। उसने खुद को फालता का बेटा बताते हुए कहा था कि उसका सपना क्षेत्र को सोनार फालता बनाना है। उसने यह भी दावा किया था कि राज्य सरकार और मुख्यमंत्री क्षेत्र के विकास के लिए कई योजनाएं चला रही हैं और वह विकास कार्यों में सहयोग करना चाहता है।
चुनाव परिणाम के बाद हो गया था फरार
4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद जहांगीर खान सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 21 मई तक वह पूरी तरह गायब हो चुका था। पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। जांच एजेंसियों को शक था कि वह राज्य छोड़कर कहीं और छिपा हुआ है। इसी बीच उसके नेपाल बॉर्डर की ओर जाने की खबरें भी सामने आई थीं।
नेपाल के रास्ते विदेश भागने की थी तैयारी?
सूत्रों के अनुसार, जहांगीर खान ने पहले अदालत से सुरक्षा की मांग की थी। लेकिन बाद में राज्य सरकार ने उसकी सुरक्षा वापस लेने के लिए आवेदन दिया था।
इसी दौरान जांच एजेंसियों को जानकारी मिली कि वह नेपाल के रास्ते विदेश भागने की कोशिश कर सकता है। हालांकि STF ने समय रहते कार्रवाई करते हुए उसे नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया।
कई मामलों की जांच तेज
जहांगीर खान की गिरफ्तारी को STF की बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि उससे कई मामलों में पूछताछ की जाएगी। साथ ही उसके कथित नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भी जांच की जाएगी।











