जब अपने ही हुए बागी,तब ममता के साथ चट्टान बनकर खड़े दिखे दो बिहारी चेहरे; 20 सांसद और 60 विधायक हुए दूर

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा उथल-पुथल का दौर देखने को मिल रहा है। सत्ता से बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के कई सांसदों और विधायकों के बगावती तेवरों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे समय में जब पार्टी के कई पुराने और प्रभावशाली चेहरे उनसे दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं, दो नेता ऐसे हैं जो हर हाल में ममता बनर्जी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ये दोनों नेता बिहार से ताल्लुक रखते हैं और इनके नाम हैं शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद।
टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। पार्टी के कई विधायक और सांसद नेतृत्व को लेकर सवाल उठा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि पार्टी लाइन से अलग रुख अपना चुके हैं। इससे ममता बनर्जी के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि लोकसभा के कई सांसदों ने अलग समूह बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। वहीं कुछ नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी भी जाहिर की है। इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है।
कई बड़े नेताओं ने दिखाई नाराजगी
टीएमसी से जुड़े कई प्रमुख नेताओं के नाम बगावत की चर्चाओं में सामने आए हैं। इनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, सायोनी घोष, यूसुफ पठान, रचना बनर्जी और अन्य सांसदों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। राज्यसभा के कुछ सदस्यों ने भी पार्टी से दूरी बनाने का फैसला किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता में बदलाव के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। यही वजह है कि टीएमसी को लगातार झटके लग रहे हैं।
संकट के दौर में ममता के साथ खड़े दिखे शत्रुघ्न सिन्हा
जब पार्टी के कई नेता अलग राह चुनते दिखाई दे रहे हैं, तब आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनके बारे में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन उनका रुख पूरी तरह स्पष्ट है। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि मुश्किल समय में ममता जी मेरे साथ खड़ी थीं और आज जब वह कठिन दौर से गुजर रही हैं तो मैं उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकता।
कीर्ति आजाद ने भी दिखाई पूरी निष्ठा
बर्दवान-दुर्गापुर से सांसद और टीएमसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कीर्ति आजाद भी लगातार ममता बनर्जी के पक्ष में मजबूती से खड़े दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बगावत करने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि किसी को पार्टी छोड़नी है तो पहले सांसद पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर अपनी नई राजनीतिक राह चुननी चाहिए। कीर्ति आजाद ने पार्टी के भीतर नाराज नेताओं को मनाने की कोशिशें भी की हैं। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कई नेताओं से संपर्क साधकर उन्हें पार्टी में बने रहने के लिए समझाने का प्रयास किया।
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बीजेपी से टीएमसी तक का सफर
दिलचस्प बात यह है कि शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद दोनों ही कभी भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। बाद में दोनों नेताओं ने बीजेपी से दूरी बनाई और अलग-अलग राजनीतिक पड़ावों से गुजरते हुए टीएमसी में पहुंचे। कीर्ति आजाद वर्ष 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे, जबकि शत्रुघ्न सिन्हा ने 2022 में पार्टी का दामन थामा था।
ममता बनर्जी ने इन दोनों बाहरी और गैर-बंगाली नेताओं को सियासी अहमियत ही नहीं बल्कि चुनावी मैदान में उतारा। ममता की बंगाली अस्मिता के राजनीतिक दौर में दोनों बाहरी नेताओं को सांसद भेजा। इसके अलावा कीर्ति आजाद को टीएमसी का राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी सौंपी. यही वजह है कि दोनों ही नेता ममता बनर्जी के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं।












