Tiger Shroff Firing Case: 'डेड लेटर बॉक्स' से पहुंचाए गए हथियार! अमृतसर से मुंबई तक फैला नेटवर्क, 7 गिरफ्तार आरोपियों को लेकर बड़ा खुलासा

टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले की जांच में हथियार सप्लाई करने वाले कथित सिंडिकेट को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, हमले में इस्तेमाल किए गए ‘डेड लेटर बॉक्स’ के जरिए आरोपियों तक पहुंचाए गए थे। इस तरीके में हथियारों को पहले किसी तय जगह पर रख दिया जाता है और फिर दूसरा व्यक्ति वहां से उन्हें उठा लेता है। मामले में ऋतिक, रेहान और फूल सिंह को मुख्य आरोपियों के तौर पर गिरफ्तार किया गया है। वहीं, हमले की साजिश और हथियारों की सप्लाई में कथित भूमिका के आरोप में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कुणाल, सुमित, राधा और बबीता को गिरफ्तार कर मुंबई पुलिस को सौंपा है। अब जांच का फोकस इस बात पर है कि हथियार कहां से आए, उन्हें मुंबई तक किसने पहुंचाया और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
हथियार सप्लाई करने वाले नेटवर्क का खुलासा
टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में जांच एजेंसियां हमले में इस्तेमाल किए गए हथियारों की सप्लाई चेन को खंगाल रही हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों तक हथियार पहुंचाने के लिए ऐसे तरीके का इस्तेमाल किया गया, जिसमें हथियार रखने वाले और उन्हें उठाने वाले व्यक्ति के बीच सीधे संपर्क की जरूरत नहीं पड़ती। इसी तरीके को ‘डेड लेटर बॉक्स’ कहा जाता है। जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति किसी तय स्थान पर हथियार रखता था, जबकि दूसरा व्यक्ति बाद में वहां पहुंचकर उन्हें उठा लेता था। इस खुलासे ने जांच को हथियारों की खरीद, उनके परिवहन और कथित साजिश से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंचाने की दिशा दी है।
दिल्ली से गिरफ्तार हुए कुणाल, सुमित, राधा और बबीता
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मामले में कथित साजिश और हथियारों की सप्लाई से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम कुणाल, सुमित, राधा और बबीता बताए गए हैं। गिरफ्तारी के बाद इन्हें मुंबई पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इन चारों पर उन हथियारों को जुटाने और पहुंचाने में भूमिका निभाने का आरोप है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर तीन हमलावरों ने किया था।
- कुणाल: हथियारों का इंतजाम करने में भूमिका।
- सुमित: हथियार जुटाने और उन्हें आगे पहुंचाने में सहयोग।
- राधा: मुंबई के दादर में हथियार पहुंचाने के आरोप।
- बबीता: हथियारों की डिलीवरी में शामिल होने का आरोप।
अमृतसर से हथियार लेने क्यों गए थे कुणाल और सुमित?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुणाल और सुमित पर करीब दो सप्ताह पहले अमृतसर हथियार लेने गए थे। बताया गया है कि हथियार जिस स्थान पर रखे गए थे, उसकी जानकारी अनिल पंडित ने उन्हें पहले ही भेज दी थी। जांच से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, कुणाल और सुमित को कथित तौर पर यह नहीं पता था कि हथियार उस स्थान पर किसने रखे थे। इससे जांच एजेंसियों के सामने हथियारों के वास्तविक स्रोत और उन्हें वहां पहुंचाने वाले व्यक्ति की पहचान करने की चुनौती है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अमृतसर में हथियार रखने वाले व्यक्ति और कथित सप्लाई नेटवर्क के दूसरे सदस्यों के बीच क्या संबंध था।
हथियार पहुंचाने के लिए दिए गए 70 से 80 हजार रुपए?
मामले में पैसों के लेन-देन को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अनिल पंडित ने कथित तौर पर कुणाल और सुमित को इस काम के लिए 70 से 80 हजार रुपए दिए थे। बताया गया है कि इस रकम में से करीब 10 से 12 हजार रुपए राधा और बबीता को दिए गए थे। आरोप है कि दोनों महिलाओं ने मुंबई के दादर में जाकर तीन लोगों को बंदूकें सौंपी थीं। इन दावों की जांच के दौरान पुलिस लेन-देन, आरोपियों के बीच संपर्क और हथियारों की आवाजाही से जुड़े सबूत जुटा रही है। जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना भी जरूरी है कि भुगतान किस उद्देश्य से किया गया और इसमें अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।
सोनीपत जेल से बाहर आने के बाद अनिल पंडित से जुड़ा कुणाल?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुणाल इसी साल जुलाई में सोनीपत जेल से बाहर आया था। बताया गया है कि जेल से छूटने के बाद उसके एक दोस्त ने उसका संपर्क अनिल पंडित से कराया था। इसके बाद कुणाल कथित तौर पर एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए अनिल पंडित से बातचीत करने लगा। आरोप है कि करीब दो सप्ताह पहले उसे अमृतसर से हथियार लाने और फिर उन्हें मुंबई पहुंचाने का काम सौंपा गया। जांच एजेंसियां अब इस संपर्क की अवधि, बातचीत और कथित निर्देशों की पड़ताल कर रही हैं। यह भी जांच का विषय है कि हथियारों की सप्लाई के लिए दूसरे लोगों को किस तरह जोड़ा गया और पूरी प्रक्रिया की योजना कहां से बनाई गई।
डेड लेटर बॉक्स क्या है और पुलिस के लिए क्यों अहम है यह सुराग?
डेड लेटर बॉक्स एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें कोई व्यक्ति सामान या संदेश किसी तय स्थान पर छोड़ देता है और दूसरा व्यक्ति बाद में वहां से उसे ले लेता है। इससे दोनों के बीच सीधे मिलने की जरूरत नहीं रहती। इस मामले में पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कथित तौर पर हथियारों की सप्लाई के लिए इसी तरह का तरीका अपनाया गया। जांच के लिहाज से यह सुराग महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे हथियार रखने वाले व्यक्ति, उन्हें उठाने वाले लोगों और उनके बीच संपर्क कराने वाले व्यक्ति की पहचान करने में मदद मिल सकती है। पुलिस इस कथित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियारों की व्यवस्था किसने की और उन्हें मुंबई तक पहुंचाने की पूरी योजना कैसे बनाई गई।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में अब आगे क्या?
इस मामले में अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, सात लोगों की गिरफ्तारी का जिक्र है। इनमें ऋतिक, रेहान और फूल सिंह को मुख्य आरोपी बताया गया है, जबकि कुणाल, सुमित, राधा और बबीता पर कथित साजिश तथा हथियारों की सप्लाई में भूमिका निभाने के आरोप हैं। फिलहाल, इन सवालों के जवाब जांच और उपलब्ध सबूतों से सामने आने बाकी हैं। आरोपियों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकेगा।



















