CJP आंदोलन पर अभिजीत दिपके का बड़ा बयान, बोले- सौरव और आशुतोष ही लेते थे सारे फैसले!

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने ताजा वीडियो संदेश में पार्टी के आंदोलन और उसके नेतृत्व को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका आंदोलन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे थे। दिपके के मुताबिक, कई बड़े फैसले दोनों नेता लेते थे और वह उनके निर्देशों का पालन करते थे। फिलहाल, दोनों नेता न्यायिक हिरासत में हैं। इस बीच दिपके ने समर्थकों से दिवाली तक किसी नए प्रदर्शन में शामिल नहीं होने और अपने परिवारों के साथ समय बिताने की अपील की है।
आंदोलन के पीछे सौरव और आशुतोष की बड़ी भूमिका
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए करीब 16 मिनट के वीडियो में कहा कि आंदोलन को आगे बढ़ाने में सौरव दास और आशुतोष रांका का अहम योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि अगले दिन के कार्यक्रम और विरोध की योजना को लेकर दोनों नेता उन्हें निर्देश देते थे। दिपके ने यह भी माना कि फैसले लेने की उनकी क्षमता दोनों नेताओं से बेहतर थी। उनके इस बयान से CJP के भीतर जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर नई चर्चा शुरू हो सकती है।
‘दोनों मेरे भाई हैं’, भावुक हुए दिपके
वीडियो संदेश में दिपके सौरव और आशुतोष का जिक्र करते हुए भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि दोनों उनके लिए केवल पार्टी के साथी नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा हैं। उनके जेल में रहने से उन्हें काफी दुख हो रहा है। दिपके ने बताया कि तीनों का एक निजी व्हाट्सऐप ग्रुप था, जिसमें वे मजेदार संदेश और मीम साझा करते थे। उन्होंने कहा कि वह आज भी उस ग्रुप को खोलते हैं और दोनों की कमी महसूस करते हैं।
दिवाली तक कोई प्रदर्शन नहीं करने का ऐलान
दिपके ने पार्टी के समर्थकों से कुछ समय के लिए आंदोलन से दूरी बनाकर अपने घर-परिवार पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने साफ किया कि दिवाली तक CJP की ओर से कोई विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने की योजना नहीं है। उन्होंने समर्थकों से कहा कि त्योहार के दौरान अपने प्रियजनों के साथ वक्त बिताएं और सौरव तथा आशुतोष को भी याद रखें, जो फिलहाल अपने परिवारों से दूर हैं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद जेल में दोनों नेता
सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि CJP के कार्यकर्ताओं ने निर्धारित प्रदर्शन स्थल से जुड़ी पाबंदियों के बावजूद वहां पहुंचने की कोशिश की और पुलिस के बैरिकेड पार किए। दोनों नेताओं को 13 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में रखा गया है। 19 अक्टूबर को अदालत ने उनकी हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी थी। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।
हिंसक आंदोलनों से तुलना पर जताई नाराजगी
दिपके ने CJP के विरोध-प्रदर्शनों की तुलना फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शनों से किए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सौरव और आशुतोष ने जेल जाने के बावजूद शांति का रास्ता चुना। उनके मुताबिक, दोनों नेताओं ने गुस्से और नफरत के बजाय अहिंसा को महत्व दिया। दिपके ने उनके तरीके की तुलना महात्मा गांधी के सत्याग्रह से भी की और कहा कि शांतिपूर्ण विरोध ही आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है।
PM मोदी ने बताए देश के 3 दुश्मन, दशहरे पर रावण दहन के बाद दिया एकजुटता का संदेश
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
CJP के प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के विरोध में किए जा रहे हैं। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठा रही है। इससे पहले संगठन ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चलाया था। अब सौरव और आशुतोष की हिरासत के बीच पार्टी ने अस्थायी विराम का ऐलान किया है।




















