हर्षित चौरसिया, जबलपुर। देश के सबसे चर्चित नेशनल पार्क कान्हा टाइगर रिजर्व की जैव विविधता में एक और अध्याय जुड़ने जा रहा है। करीब 100 साल बाद एक बार फिर से रिजर्व के जंगलों में जंगली भैंसों (वाइल्ड बफेलो) की हुंकार गूंजेगी। जंगली भैंसा पुनर्स्थापन प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश से वन विभाग व विशेषज्ञों की पूरी टीम पहली खेप को लाने के लिए असम पहुंच चुकी है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह टीम असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से पहली खेप में 15 वाइल्ड बफेलो को लाने में सफल होगी।
कान्हा टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा ने बताया कि जंगली भैंसों को कान्हा में फिर बसाने के लिए यहां पर इनके लिए सूपखार रेंज में एक विशाल बाड़ा तैयार किया जा रहा है। करीब 117 हेक्टेयर में आगे के चरणों में आने वाले वाइल्ड बफेलो के विचरण के लिए व्यवस्थाएं जुटाई जा रही हैं। अभी पहली खेप के लिए 18 हेक्टेयर का बाड़ा बनाया गया है। इसमें इनके खान-पान की अच्छी व्यवस्था रखी गई है।
मध्यप्रदेश में जंगली भैंसों की आबादी पिछले 100 वर्षों से भी अधिक समय पहले समाप्त हो चुकी थी। वर्तमान समय में देश में जंगली भैंसों की प्राकृतिक आबादी मुख्य रूप से असम राज्य तक सीमित रह गई है। छत्तीसगढ़ में भी ये हैं, किंतु इनकी संख्या अत्यंत सीमित है। देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा किए गए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया कि कान्हा टाइगर रिजर्व जंगली भैंसों के पुन:स्थापन के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र है। अध्ययन में घास के मैदानों की गुणवत्ता, जल स्रोतों की उपलब्धता, मानव हस्तक्षेप की न्यूनता और अन्य शाकाहारी जीवों के दबाव जैसे कारकों का मूल्यांकन किया गया है।
यह प्रोजेक्ट उन्हें उनके पुराने घर में वापस बसाने की एक कोशिश है। उनकी देखभाल और खानपान के लिए समुचित व्यवस्थाएं इस बाड़े में की गई हैं। पहले खेप में अनुमानित है कि 15 जंगली भैंसे आएंगे। टीम जा चुकी है।
रविन्द्रमणि त्रिपाठी, फील्ड डायरेक्टर, कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला
प्रोजेक्ट के तहत 50 वाइल्ड बफेलो कान्हा टाइगर रिजर्व में लाए जाना है। पहले चरण में हमें 15 की अनुमति मिली है, जिसके लिए एक्सपर्ट और वेटरनरी डॉक्टर्स की टीम असम जा चुकी है। कान्हा में बाड़ा तैयार कराया गया है।
शुभरंजन सेन, पीसीसीएफ, मुख्य वन विभाग मप्र