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55 जिलों के शराब ठेके की प्रक्रिया को चुनौती :हाईकोर्ट ने याचिका पर जताई आपत्ति, अब दो सप्ताह बाद होगी सुनवाई

मामले पर हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने दलीलें रखीं। वहीं शासन की ओर से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा हाजिर हुए। बेंच ने कहा कि यह याचिका कैसे मेन्टेनेबल है
हाईकोर्ट ने याचिका पर जताई आपत्ति, अब दो सप्ताह बाद होगी सुनवाई
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पीपुल्स संवाददाता, जबलपुर। मध्यप्रदेश के 55 जिलों में शराब की सप्लाई की टेंडर प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। एक जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह प्रक्रिया सिर्फ प्रदेश के 8 ग्रुप्स को फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है, जो पूरी तरह से फिक्स है। हालांकि बुधवार को मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने याचिका की ग्राह्यता (मेन्टेनिबिल्टी) को लेकर कड़ा ऐतराज जताया। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से दस्तावेज पेश करने समय चाहा गया। बेंच ने मामले पर दो सप्ताह बाद सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। 

    जबलपुर के अधिवक्ता योगेन्द्र पटेल की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार द्वारा 26 फरवरी 2026 को जारी टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह से फिक्स है और इसे स्थानीय डिस्टिलर्स को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। याचिका में कहा गया है कि प्रदेश के 55 जिलों में सरकारी वेयरहाउस को शराब सप्लाई के लिए केवल मध्यप्रदेश में स्थित निर्माताओं को ही पात्र बनाया गया है।

    यह भी पढ़ें: हाईकोर्ट की टिप्पणी: सरकार पहल करे तो घटेंगे हजारों मुकदमे, नोटिस जारी कर सरकार को नीति बनाने कहा

    इससे बाहर के प्रतिस्पर्धियों को सीधे तौर पर बाहर कर दिया गया, जिससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई। याचिका में यह भी आरोप है कि स्थानीय डिस्टिलर्स ने आपस में कार्टेल बनाकर पहले ही सप्लाई एरिया बांट लिए हैं। टेंडर सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है, जबकि असली निर्णय पहले ही बंद कमरों में कर लिए गए, जो अवैधानिक है। 

    मामले पर हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने दलीलें रखीं। वहीं शासन की ओर से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा हाजिर हुए। बेंच ने कहा कि यह याचिका कैसे मेन्टेनेबल है, क्योंकि न तो याचिकाकर्ता टेण्डर में शामिल हुआ और न इसमें उसकी कोई भूमिका है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से जरूरी दस्तावेज पेश करने समय चाहा गया, जो डिवीजन बेंच ने देकर सुनवाई बढ़ा दी।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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