पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA प्रचंड मतों से जीत की तरफ आगे बढ़ रही है। महागठबंधन की दो पार्टियां RJD और कांग्रेस दोनो के नेताओं की बुरी हार हो रही है। सबसे बड़ा झटका RJD नेता तेजस्वी यादव को लग रहा है। उनका राजनीतिक कॅरियर डांवाडोल हो रहा है। अपनी पार्टी के दूसरे प्रत्याशियों को जिताना तो दूर की बात है, तेजस्वी खुद की सीट पर कभी आगे तो कभी पीछे चल रहे हैं। इस चुनाव मेँ RJD सबसे खराब परफॉर्म कर रही है। यह अब तक का उसका सबसे खराब प्रदर्शन है। महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को अपना भावी मुख्यमंत्री घोषित किया था, लेकिन अग रुझान परिणाम में बदले तो उनका नेता प्रतिपक्ष बनना भी मुश्किल हो जाएगा।
तेजस्वी यादव की पार्टी RJD मात्र 25 से 30 सीटों पर बढ़त बनाती दिख रही है। यह जानना जरूरी है कि 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में कम से कम अपने 25 विधायकों का साथ जरूरी है। अगर तेजस्वी के 25 विधायक जीत पाते हैं तो ही वे नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी तक पहुंच पाएंगे। अभी जो रुझान आ रहे हैं वो RJD के लिए खतरे का संकेत साबित हो रहे है। अगर RJD के 30 विधायक भी जीतते हैं तो यह पार्टी के 2020 के प्रदर्शन यानी 75 सीटों से भी आधे नहीं हो पाएंगे। खुद तेजस्वी यादव की सीट फंसी हुई है। राघोपुर विधानसभा सीट पर 16वें राउंड के बाद वे 9 हजार से ज्यादा वोटों से पिछड़ गए थे। हालांकि उसके बाद वे चार हजार वोट से आगे हो गए। गौरतलब है कि यहां भाजपा ने सतीश कुमार यादव को उतारा है। सतीश एक बार तेजस्वी यादव की मां पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को हरा चुके हैं।
2010 के विधानसभा चुनावों में RJD को करारी हार का सामना करना पड़ा था। तब RJD 168 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसके खाते में सिर्फ 22 सीटें ही आईं थी। इस वजह से नेता प्रतिपक्ष का पद RJD को नहीं मिल पाया था। उस चुनाव में JDU को 115 और BJP को 91 सीटें मिली थीं। NDA को कुल 206 सीटें मिली थीं।