भोपाल। प्रदेश में शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य किए जाने को लेकर प्रदेश भर के शिक्षक विरोध में आ गए हैं। संचालक लोक शिक्षण (DPI) द्वारा जारी एक आदेश में शिक्षकों को टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया है। इस आदेश के विरोध में शुक्रवार को प्रदेश भर के शिक्षकों द्वारा शासकीय शिक्षक संगठन के बैनर तले सभी जिलों में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपे गए। राजधानी में संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया।
ज्ञात हो कि DPI के आदेश के बाद TET के दायरे में वर्ष 2006 के पहले के करीब सवा लाख शिक्षक आ रहे हैं। इन्होंने किसी प्रकार की पात्रता परीक्षा पास नहीं की है। इस आदेश के बाद प्रदेशभर के शिक्षक संगठन नाराज हैं। शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राकेश दुबे ने कहा कि यह आदेश विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना जारी किया गया है। इससे करीब सवा लाख शिक्षकों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि करीब 25-25 वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षकों पर अचानक नई शर्त लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
राजधानी में शिक्षकों ने कलेक्टर कार्यालयों के सामने रैली, नारेबाजी और प्रदर्शन कर सरकार से इस आदेश को तुरंत रद्द करने की मांग की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश सरकार को भी शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल, जिलाध्यक्ष राजेश साहू और अन्य कर्मचारी-शिक्षक संगठनों के नेताओं ने सभा को संबोधित किया। इस दौरान शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों ने सरकार से शिक्षकों की मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की। उपेन्द्र कौशल ने कहा कि 15 से 28 मार्च के बीच प्रदेशभर में सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
संगठन ने अभी सरकार से ज्ञापन के माध्यम से मांग की है। यदि एक सप्ताह के भीतर मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है और आदेश वापस नहीं लिया जाता है, तो 29 मार्च को प्रदेश के सभी शिक्षक संगठनों की बैठक बुलाकर संयुक्त शिक्षक मोर्चा बनाया जाएगा और आगे बड़े आंदोलन की रणनीति घोषित की जाएगी।
प्रदेश के अधिकांश शिक्षक शिक्षाकर्मी और संविदा शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे। उनकी नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और राज्य सरकार द्वारा बनाए गए शिक्षाकर्मी भर्ती अधिनियम 1997, शिक्षाकर्मी भर्ती अधिनियम 1998 तथा अध्यापक भर्ती अधिनियम 2008 के तहत हुई थी। इन सभी भर्ती नियमों और सेवा शर्तों में कहीं भी TET परीक्षा पास करना अनिवार्य नहीं बताया गया था। ऐसे में वर्षों बाद नई शर्त लागू करना नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।
डीपीआई का यह आदेश न्यायसंगत नहीं है। इस आदेश से प्रदेश के लगभग सवा लाख से अधिक शिक्षकों में भय और असंतोष का माहौल बन गया है। आज सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया गया है, यदि शीघ्र ही आदेश वापस नहीं लिया जाता है तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।