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Ethanol Production :एथेनॉल बनाने में पानी करेगा बढ़ी मदद, जानें 1 लीटर की खपत में कितना पानी का होगा इस्तेमाल

भारत के एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम में मक्का एक महत्वपूर्ण फसल बनकर उभरा है। हालांकि, मक्के से 1 लीटर एथेनॉल उत्पादन के लिए भी करीब 4,670 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
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एथेनॉल बनाने में पानी करेगा बढ़ी मदद, जानें 1 लीटर की खपत में कितना पानी का होगा इस्तेमाल

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने भारत में ईंधन के दामों में भारी बढ़ोतरी की है। ऐसे में देश भविष्य में पेट्रोल और डिजिल पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल प्रोडक्शन पर काम करा रहा है। हालांकि एथेनॉल को देशभर में तेजी से लाना आसान नहीं होगा। एथेनॉल प्लांट में पानी का काफी कम उपयोग होता है, लेकिन जिस फसल से यह तैयार हो रहा है उस पर काफी ज्यादा मात्रा में एथेनॉल यूज होता है। 

हालांकि, इस लक्ष्य के साथ एक बड़ी चुनौती भी जुड़ी हुई है पानी की भारी खपत। विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन का वास्तविक जल पदचिह्न (वॉटर फुटप्रिंट) काफी बड़ा है, क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाली फसलों की खेती के दौरान बड़ी मात्रा में पानी खर्च होता है।

1 लीटर एथेनॉल के लिए हजारों लीटर पानी

एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया में डिस्टिलरी प्लांट सीधे तौर पर बहुत कम पानी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यदि फसल की खेती से लेकर उत्पादन तक पूरे चक्र को देखा जाए तो 1 लीटर एथेनॉल तैयार करने में 2,800 से 10,790 लीटर तक पानी की जरूरत पड़ सकती है। यह मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि एथेनॉल किस फसल से बनाया जा रहा है।

चावल से बनने वाला एथेनॉल सबसे ज्यादा जल-खपत वाला

एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल में चावल का वॉटर फुटप्रिंट सबसे अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक, 1 लीटर एथेनॉल बनाने के लिए करीब 2.5 से 3 किलोग्राम चावल की जरूरत होती है और इसके लिए लगभग 10,790 लीटर पानी खर्च होता है। यही कारण है कि चावल आधारित एथेनॉल को सबसे ज्यादा पानी खर्च करने वाला विकल्प माना जाता है।

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मक्का में भी अधिक मात्रा में होता है पानी का उपयोग

भारत के एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम में मक्का एक महत्वपूर्ण फसल बनकर उभरा है। हालांकि, मक्के से 1 लीटर एथेनॉल उत्पादन के लिए भी करीब 4,670 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। यह चावल से कम जरूर है, लेकिन जल खपत के लिहाज से इसे भी कम नहीं माना जा सकता।

गन्ना अब भी बेहतर विकल्प

गन्ना लंबे समय से भारत में एथेनॉल उत्पादन का प्रमुख स्रोत रहा है। फसल की किस्म, क्षेत्र और जलवायु के आधार पर गन्ने से 1 लीटर एथेनॉल बनाने में लगभग 2,860 से 3,630 लीटर पानी लगता है। पानी की खपत के मामले में यह चावल और मक्का की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जाता है।

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डिस्टिलरी प्लांट में कम खर्च होता है पानी

आम धारणा के विपरीत एथेनॉल फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रक्रिया के दौरान बहुत ज्यादा पानी खर्च नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, 1 लीटर एथेनॉल बनाने में सीधे तौर पर केवल 3 से 5 लीटर पानी का उपयोग किया जाता है। कुल जल खपत का बड़ा हिस्सा फसलों की खेती के दौरान होता है।

भूजल पर बढ़ सकता है दबाव

पर्यावरण विशेषज्ञों और नीति आयोग सहित कई संस्थानों ने चेतावनी दी है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए पानी-प्रधान फसलों की खेती बढ़ने से भूजल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। भारत के कई राज्यों में पहले ही भूजल स्तर लगातार घट रहा है। ऐसे में चावल और गन्ने जैसी फसलों पर आधारित एथेनॉल उत्पादन के विस्तार को लेकर दीर्घकालिक स्थिरता और जल सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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